बाराबंकी। आतंकवादी संगठन हरकत-उल-जेहाद-अल-इस्लामी से जुड़कर भारत के खिलाफ षडयंत्र रचने, हथियारों व विस्फोटकों के साथ आतंकवादियों की भारत में घुसपैठ कराने में मदद करने वाला मो. शाद जेल में ही उम्र बिताएगा। राज्यपाल ने फाॅर्म-ए लाइसेंस के तहत उसकी समय पूर्व रिहाई की मांग ठुकरा दी है। बाराबंकी जिला जेल में बंद शाद अब बाकी जीवन भी जेल में ही बिताएगा। शासन ने डीजीपी कारागार को इसका आदेश जारी किया है।
मो. शाद ज्योतिबाफूलेनगर (अमरोहा) स्थित चंद्रपाल कोठी का निवासी है। अप्रैल 2006 में उसने आतंकवादी संगठन हरकत-उल-जेहाद-अल-इस्लामी की मदद की। भारतीय युवाओं को विदेशी भूमि पर आतंकी ट्रेनिंग दिलवाने के साथ विदेशी आतंकियों की भारत में विस्फोटक के साथ घुसपैठ कराने का अपराध किया। गिरफ्तारी के बाद मो. शाद पर मुकदमा चला और लखनऊ के अपर जिला एवं सत्र न्यायालय एफटीसी ने 23 जनवरी 2008 को उसे उम्रकैद की सजा सुनाई। 25 साल जेल में बिताने के बाद शाद व उसके परिजनों ने फाॅर्म ए के तहत शासन में समय पूर्व रिहाई की मांग की। उसकी उम्र इस समय करीब 50 साल हो गई है।
फाइल शासन में गई और बैठक हुई। प्रोबेशन बोर्ड ने समीक्षा के बाद माना कि इस तरह के अपराधियों की रिहाई से समाज में गलत संदेश जाएगा। सभी रिपोर्ट देखने के बाद राज्यपाल से समय पूर्व रिहाई ठुकरा दी। बाराबंकी के जेल अधीक्षक कुंदन कुमार ने बताया कि शाद को विशेष निगरानी में रखा गया है।