शिक्षा क्षेत्र में बेहतर कार्यों के लिए पूर्व माध्यमिक विद्यालय बड़ेल के प्रधानाचार्य सुभाष चंद्र श्रीवास्तव का चयन राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए किया गया है। वर्ष 1994 से पौधरोपण अभियान की शुरुआत करने वाले शिक्षक ने कई अन्य सामाजिक कार्य भी किए हैं।
शिक्षक को राष्ट्रीय सम्मान मिलने से परिवारीजनों और शुभचिंतकों में खुशी की लहर है। सुभाष चंद्र ने शिक्षा क्षेत्र में बदलाव लाने के लिए वर्ष 1997 से अभियान शुरू किया, जिसमें पहला कार्य विद्यालयों में टीचिंग लर्निंग मटेरियल (टीएलएम) का पैसा दिलाने का था।
उनके सहयोग से 57 प्राथमिक विद्यालय व 11 जूूनियर हाईस्कूल का पांच सौ रुपये वार्षिक दर से पैसा मिलने लगा। लेकिन यह धनराशि पर्याप्त नहीं थी। उन्होंने बताया कि इस मद में करीब 10 से 12 हजार रुपये वार्षिक खर्च आता है। इसके बाद वर्ष 2007 में जल संरक्षण के लिए वाटर रिचार्ज बनवाने के लिए लोगों को प्रेरित किया।
40 हजार रुपये के निजी खर्च से 2012 में पूर्व माध्यमिक विद्यालय में विज्ञान लैब तैयार कराया। पांच हजार रुपये के सरकारी बजट पर पुस्तकालय का डेवलपमेंट कराया। इसमें 667 पुस्तकें मौजूद हैं।
बालिका शिक्षा उत्थान के लिए प्रत्येक विद्यालय में मीना मंच व महिला जागरूकता के लिए महिला संसद का गठन जूनियर स्कूलों में कराया। इसी प्रकार के विशिष्ट कार्यों के लिए सुभाष चंद्र श्रीवास्तव को पांच सितंबर को दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।