घाघरा का पानी भलेे ही स्थिर हो गया हो लेकिन एलिगभन चरसरी तटबंध के निकट नदी का पानी तटबंध को काट रहा है। तटबंध के कटान की चपेट में आने से मौके पर मौजूद अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए हैं। लेकिन दोपहर बाद कटान धीमी होने के बाद तटबंध की मरम्मत का कार्य तेज हो गया है। वहीं नदी का पानी खतरे के निशान से अभी भी 44 सेमी ऊपर बह रहा है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के दर्जनाें गांव ऐसे हैं जहां पर नदी का पानी अभी भी भरा हुआ है। वहीं सोमवार को कमिशभनर देवीपाटन मंडल सुधीर कुमार दीक्षित और जिलाधिकारी गोंडा आशुतोष निरंजन ने तटबंध पर पहुंच मरम्मत कार्य का जायजा लिया तथा कार्य में और तेजी लाने के आदेश दिए।
गनेशपुर प्रतिनिधि के अनुसार घाघरा नदी का पानी सोमवार को भले ही स्थिर हो गया हो लेकिन यह खतरे के निशान 106.076 से बढ़कर 106.516 (खतरे के निशान से 44 सेमी ऊपर) अभी भी बह रहा है। टिकैतनगर प्रतिनिधि के अनुसार सोमवार की भोर नदी का पानी एलिगभन चरसरी तटबंध के निकट बने कटवन को काटकर बंधे की कटान करने लगा है।
यह देख बंधे पर मौजूद अधिकारियों के हाथ पांव फूल गए। लोगों का कहना है कि यदि इसी तरह से कटान होती रही तो बंधे को बचा पाना मुश्किल है। लेकिन दोपहर बाद कटान कम होने के बाद अधिकारियों ने मरम्मत का कार्य तेज कर दिया है।
वहीं कमिशभनर देवीपाटन मंडल सुधीर कुमार दीक्षित, जिलाधिकारी गोंडा आशुतोष निरंजन ने एलिगभन चरसरी तटबंध पर चल रहे मरम्मत कार्य का जायजा लिया और मौके पर मौजूद बाढ़ खंड के अधिकारियों को मरम्मत कार्य में तेजी लाए जाने के निर्देश दिए। बेलहरा प्रतिनिधि के अनुसार घाघरा नदी का पानी कचनापुर गांव के निकट तेजी से कटान कर रहा है।
वहीं जमका, खुज्जी, हेतमापुर और बिझौली गांव के लोग परिवारीजनों के बंधे पर शरण लिए हुए हैं। क्षेत्र के कई दर्जन गांव ऐसे हैं जहां अभी भी बाढ़ का पानी भरा हुआ है। जिससे संक्रामक रोगों के फैलने का खतरा बढ़ने लगा है।
घाघरा नदी का पानी खतरे के निशान से 44 सेमी ऊपर पहुंच कर स्थिर हो गया है। बाढ़ ड्यूटी में लगे राजस्व कर्मियों को निर्देश दिए गए हैं कि बंधे पर जो परिवार ठहरे हुए हैं उन्हें किसी प्रकार की दिक्कत न होने पाए इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए। -हरिकेश चौरसिया, अपर जिलाधिकारी