श्रुतिमान शुक्ल
बाराबंकी। जिले में साइबर अपराधियों ने ठगी के लिए ‘संदिग्ध खाते’ को हथियार बना लिया है। इन खातों के जरिए लाखों-करोड़ों का अवैध लेनदेन किया जा रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि कई खाताधारक ऐसे हैं, जिन्हें यह तक नहीं पता कि उनके खाते से साइबर ठगी की रकम का ट्रांजेक्शन हो रहा है, जबकि कुछ लोग जानबूझकर 5 से 10 प्रतिशत कमीशन के लालच में अपने खाते ठगों को सौंप रहे हैं।
इसके लिए साइबर पुलिस की एक विशेष टीम गठित की गई है। खाते फ्रीज कर जांच की जा रही है। पुलिस जांच में सामने आया है कि जिले में करीब 500 ऐसे बैंक खाते हैं, जिनका इस्तेमाल हाल के दिनों में साइबर ठगी की रकम के लेनदेन के लिए किया गया।
इन सभी खातों को पुलिस ने रडार पर ले लिया है और इनके पीछे सक्रिय नेटवर्क की परतें खोली जा रही हैं। अभी पांच दिन पहले मुजफ्फरनगर पुलिस ने बाराबंकी के खालिद को गिरफ्तार कर साइबर ठगी के बड़े नेटवर्क का खुलासा किया था। इस कार्रवाई में मुजफ्फरनगर में हुई तीन करोड़ रुपये की साइबर ठगी का भी पर्दाफाश हुआ। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि साइबर अपराधियों को सबसे ज्यादा जरूरत तथाकथित ‘खच्चर खातों’ की होती है, ताकि वे आसानी से ठगी की रकम इधर-उधर कर सकें। बाराबंकी पुलिस ने पिछले दो वर्षों में करीब एक दर्जन साइबर ठगी मामलों का खुलासा किया है। पड़ताल में सामने आया कि साइबर ठग लगातार नए-नए खातों का इस्तेमाल कर रहे हैं। साइबर क्राइम पोर्टल पर दर्ज शिकायतों के विश्लेषण से यह भी पता चला कि हाल के महीनों में जिले के सैकड़ों खातों में संदिग्ध ट्रांजेक्शन हुए हैं।