गन्ने की आवक कम होने के कारण हैदरगढ़ चीनी मिल मंगलवार सुबह ठप हो गई। मिल अधिकारियों ने बुधवार शाम तक ये बात दबाए रखी। पूछने पर बताया कि बारिश के कारण गन्ना नहीं आ पाया। बुधवार देर शाम तक पेराई चालू नहीं हो सकी थी। जबकि मिल में लगभग 50 हजार क्विंटल गन्ने का स्टॉक रखा जाता है।
बुधवार को मामला उजागर होने पर मिल प्रबंधन ने कर्मियों की आकस्मिक बैठक बुलाकर नए सिरे से दिशा-निर्देश जारी किए हैं। हैदरगढ़ चीनी मिल में अभी से ही नो केन की स्थिति उत्पन्न हो गई है। गन्ना पेराई शुरू होने के बाद नो केन के कारण कई बार मशीनों को एक या दो घंटे विराम देना पड़ा था। मगर गन्ने की कमी के चलते मंगलवार सुबह से चीनी मिल की पेराई एकदम बंद हो गई।
मिल प्रशासन पेराई बंद होने की बात दबाए रहा। जिला गन्ना अधिकारी को भी मामले की जानकारी नहीं दी। बुधवार शाम मामला उजागर होने पर मिल प्रशासन ने आनन-फानन में स्टाफ की आकस्मिक बैठक बुलाकर नए सिरे से दिशा-निर्देश दिए।
दरअसल भुगतान में देरी के चलते किसान मिल को गन्ना देने से कतरा रहे हैं। मगर सरकार व मिल प्रशासन ये मानने को तैयार नहीं है। इसी के चलते गन्ना क्षेत्र घटने के बाद भी मिल ने गत वर्ष के बराबर 36 लाख क्विंटल गन्ना पेराई का लक्ष्य निर्धारित किया था। मगर 15 लाख क्विंटल के ऊपर का आंकड़ा पहुंचने तक मिल को लगातार गन्ना मिलना बंद हो गया।
मंगलवार को गन्ने की कमी के कारण सुबह से ही मिल में पेराई पूरी तरह ठप हो गई। बुधवार देर शाम तक मिल को शुरू नहीं किया जा सका। हालांकि मिल प्रबंधन इसके लिए मंगलवार को बारिश के चलते तौल कांटों तक गन्ना नहीं पहुंचने को कारण बता रहा है। बारिश मंगलवार दोपहर में शुरू हुई। ऐसे में उसके पहले गन्ना क्यों नहीं मिला? इसका जवाब भी अधिकारियों के पास नहीं है। जबकि मिल में लगभग 50 हजार क्विंटल गन्ने का स्टॉक होना चाहिए।