प्रदेश सरकार ने प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक विद्यालयों व आंगनबाड़ी आने वाले बच्चों को प्रत्येक बुधवार को पोषाहार के अलावा दूध दिए जाने की घोषणा की गई है। इन संस्थानों में करीब साढ़े पांच लाख बच्चे पंजीकृत हैं। इनके लिए एक दिन में करीब 1.1 लाख लीटर दूध की आवश्यकता होगी, लेकिन यह दूध कहां से आएगा। विभागों के पास इसका कोई जवाब नहीं है। जनपद में भी विद्यालयों में दूध की मांग के सापेक्ष उत्पादन ही नहीं है। विभागीय आंकड़ों की मानें तो जनपद में प्रतिदिन करीब प्रतिदिन चालीस हजार लीटर दूध का ही उत्पादन हो रहा है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या नौनिहालों को दूध की जगह पानी ही पिलाया जाएगा।
जनपद में 2170 प्राथमिक विद्यालयों में करीब 2.75 लाख बच्चे पंजीकृत हैं जबकि 846 पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में करीब 94 हजार बच्चे पंजीकृत हैं। जनपद में 3052 आंगनबाड़ी केंद्रों पर 3-6 साल के करीब एक लाख साठ हजार बच्चे पंजीकृत हैं। प्रदेश सरकार ने प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों पर प्रत्येक बुधवार को प्रत्येक बच्चे को दो सौ ग्राम दूध दिए जाने की योजना बनाई गई है।
इन केंद्रों व स्कूलों में पंजीकृत करीब 5.31 लाख बच्चों के दूूध दिए जाने के लिए योजना के मुताबिक करीब 1.062 लाख लीटर दूध की जरूरत हैं, लेकिन यह दूध कहां से आएगा। इसका जवाब विभाग के पास नहीं है। जनपद में प्रतिदिन करीब चालीस हजार लीटर दूध का ही उत्पादन हो पा रहा है। सहकारी दुग्ध समितियों द्वारा रोजाना करीब बारह हजार लीटर दूध ही उत्पादित हो रहा है।
इसके अलावा नमस्ते इंडिया, अमूल, ज्ञान आदि दूध कंपनियों से दूध की खरीद की जा रही है, लेकिन यह खरीदे गए दूध को दो गुने दामों पर बाराबंकी के अलावा अन्य जनपदों में बेचा जाता है। साथ ही कई बड़ी डेयरियां अपने दूूध की खपत लखनऊ के होटलों में कर रही हैँ। बड़ी मात्रा में दूध घरों में ही खप रहा है।
दुग्ध उत्पादन सहकारी संघ के महाप्रबंधक एसएन शर्मा ने बताया कि दुग्ध उत्पादन में लगी सहकारी समितियों के पास दूध की कमी नहीं है। अभी प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में बच्चों को दूूध दिए जाने की व्यवस्था है। पराग का दूध लखनऊ से आता हैं। वहां से मांग के अनुरूप दूध उपलब्ध हैं जितनी मांग बेसिक शिक्षा विभाग से आएगी दूध मिलेगा।