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राज्य कर्मचारियों की हड़ताल, सरकारी कामकाज ठप

Tue, 22 Dec 2015 11:05 PM IST
बाराबंकी/अमर उजाला ब्यूरो
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राज्य कर्मचारियों की पेन डाउन हड़ताल का मंगलवार को जबरदस्त असर रहा। कर्मचारियों ने जबरदस्त एकता दिखाते हुए सभी कार्यालयों को बंद करा दिया। सरकार की कार्यशैली से नाराज कर्मचारियों ने जिला अस्पताल में डॉक्टरों के कमरे तक नहीं खोलने दिए। जिससे सबसे अधिक दिक्कत दूरदराज से आए मरीजों को उठानी पड़ी। अस्पताल में इलाज की सुविधा नहीं मिलने की वजह से इन्हें निजी चिकित्सकों का सहारा लेना पड़ा। वहीं विकास भवन और कलेक्ट्रेट में काम न होने से फरियादियों को निराश लौटना पड़ा।
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राज्य कर्मचारी अपनी दस सूत्री मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। मंगलवार को कर्मचारी लखपेड़ाबाग स्थित कार्यालय पर उपस्थित हुए। यहां से सभी कर्मचारी सबसे पहले जिला अस्पताल पहुंचे और डॉक्टरों के कमरों में ताले लगा दिए। इसके बाद महिला अस्पताल पहुंच वहां पर भी ताला बंदी कराई। इसके बाद कर्मचारियों का जुलूस सीएमओ आफिस को बंद कराते हुए कृषि विभाग के कार्यालय पहुंचा।

नारेबाजी करते हुए कर्मचारियों ने वन विभाग, सिंचाई विभाग, जिला आपूर्ति कार्यालय, रजिस्ट्री आफिस, कोषागार, डीआरडीए, बीएसए कार्यालय, डीआईओएस कार्यालय, विकास भवन और एआरटी कार्यालय को बंद कराया। इसके बाद सभी कर्मचारी सिंचाई विभाग के कार्यालय पर एकत्र हुए और एक सभा की। सभा को संबोधित करते हुए परिषद के जिलाध्यक्ष प्रमोद सिंह ने कहा कि सरकार कर्मचारियों की दस सूत्री जायज मांगों को नहीं मान रही है।
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 जिसकी वजह से राज्य कर्मचारियों को अपने हक के लिए इस तरह का संघर्ष करना पड़ रहा है। परिषद के जिला मंत्री राजेश तिवारी ने कहा कि जब तक हमारी मांगे मान नहीं ली जाती है एक भी कर्मचारी कार्य पर नहीं जाएगा। इस मौके पर केके मिश्रा, सर्वजीत यादव, राजकिशोर अवस्थी, हेमंत श्रीवास्तव, मनोज कश्यप, संदीप रावत, आरपी सिंह विसेन, आरपी सिंह, दिवाकर सिंह आदि मौजूद रहे।

निजी चिकित्सकों के यहां जाना पड़ा
जिला अस्पताल में तालाबंदी की वजह से सबसे अधिक दिक्कत दूर दराज से आए मरीज और उनके तीमारदारों को उठानी पड़ी। एक भी डॉक्टर का चैंबर न खुला होने के कारण कुछ मरीज तो वापस चले गए लेकिन गंभीर मरीजों को उनके तीमारदारों ने निजी चिकित्सकों को दिखाया। बजहा से दवा लेने के लिए आए इंद्रजीत ने बताया कि अस्पताल से दवा मिलना तो दूर पर्चा तक नहीं बन सका सभी डॉक्टरों के कमरे बंद थे। जिस पर निजी चिकित्सक के यहां से जाकर उपचार कराया। बरेठी निवासी रामचन्द्र ने बताया कि अगर इस बात की जानकारी होती कि मंगलवार को अस्पताल से दवा नहीं मिलेगी तो वह 50 रुपया किराया खर्च कर अस्पताल नहीं आते। इस मामले में सीएमओ डॉ. रवींद्र कुुमार ने बताया कि कर्मचारियों ने मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ किया है। कर्मचारियों के खिलाफ शासन को लिखा जाएगा।

कितना चक्कर लगाएं साहब
कर्मचारियों की हड़ताल का असर विकास भवन और कलेक्ट्रेट में भी रहा। यहां कार्यालय तो खुले थे किसी में कोई कर्मचयारी नहीं मिला। जिले के दूर दराज से फरियादी यहां से वहां भटकते रहे लेकिन कोई मदद करने वाला था। टिकैतनगर से आए राजेश सिंह ने बताया डीडीओ साहब के यहां काम था। एक सप्ताह से चक्कर लगा रहे हैँ। साहब ने आज बुलाया था लेकिन हड़ताल होने केे कारण लौट के जा रहे हैं। ऐसी ही कुछ कहानी हैदरगढ़ के राम नरायन, बंकी के देवी प्रसाद, बनीकोडर के राम सिंह और अन्य फरियादियों का रहा।  कर्मचारियों के न मिलने की वजह से उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो सका।
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