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Barabanki News: सीधी सड़कें बनी जानलेवा, 70 फीसदी हादसों का कारण तेज रफ्तार

Sun, 01 Feb 2026 11:19 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
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बाराबंकी। जिले की सड़कें अब सिर्फ रास्ता नहीं रहीं, बल्कि तेज रफ्तार के चलते मौत की पटरियां बनती जा रही हैं। विभागों की जांच में सामने आया है कि जिले में होने वाले करीब 70 प्रतिशत सड़क हादसों की वजह सिर्फ और सिर्फ तेज रफ्तार है। चौंकाने वाली बात यह है कि 65 प्रतिशत हादसे सीधी सड़कों पर और 67 प्रतिशत दुर्घटनाएं ग्रामीण इलाकों में दर्ज की गईं, जहां निगरानी लगभग न के बराबर है।
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बाराबंकी यूपी के उन 20 जिलों में शामिल है, जहां सड़क हादसों का ग्राफ लगातार ऊपर जा रहा है। यही वजह है कि शासन ने जिले को ‘जीरो फेटालिटी जिला’ की सूची में रखा, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है।
पुलिस विभाग ने जिले के आठ थाना क्षेत्रों में 10 ऐसे क्रिटिकल कॉरिडोर चिन्हित किए हैं, जहां हादसे सबसे ज्यादा होते हैं। इन जगहों पर 10 विशेष टीमें तैनात की गई हैं। बीते दो माह में इनकी रिपोर्ट बताती है कि इन इलाकों में तैनात पुलिस टीमों ने जिन हादसों की पड़ताल की, उनमें अधिकतर घटनाएं तेज रफ्तार वाहनों की वजह से हुईं।
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परिवहन विभाग के उप आयुक्त राजकुमार सिंह बताते हैं कि जिले से होकर गुजरने वाले पांच बड़े हाईवे और लखनऊ से सीधा जुड़ाव बाराबंकी की सड़कों पर भारी दबाव बनाता है। आंकड़े बताते हैं कि 61 प्रतिशत हादसे ऐसी सीधी सड़कों पर हुए, जहां वाहन बिना किसी रोक-टोक के सरपट दौड़ते हैं। परिवहन के अलावा पुलिस, पीडब्ल्यूडी और एनएचएआई और स्वास्थ्य विभागों ने जिले में ट्रामा सेंटर एम्बुलेंस बढ़ाने की सिफारिश की है।

हादसे से ज्यादा खतरनाक है इलाज तक का सफर
हादसे के बाद शुरू होता है मौत से जंग का दूसरा अध्याय। ग्रामीण इलाकों में दुर्घटना के बाद घायल को जिला अस्पताल लाया जाता है, जहां गंभीर इलाज की कोई ठोस व्यवस्था नहीं। नतीजाघायल को सीधे लखनऊ रेफर कर दिया जाता है। लेकिन यहां भी संकट खत्म नहीं होता।
लखनऊ पहुंचने में यातायात जाम के कारण एक से दृढ़ता घंटे लग जाते हैं। हर महीने 10 से 12 लोग सिर्फ इसलिए दम तोड़ देते हैं, क्योंकि उन्हें समय पर इलाज नहीं मिल पाता। _________
वर्जन-
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सरकार बाराबंकी में एम्बुलेंस और ट्रॉमा सेंटर की संख्या बढ़ाने पर विचार कर रही है, विभिन्न विभागों द्वारा दी गई रिपोर्ट में या कहा गया है जिसके बाद आदेश भी हो गया है। लोगों को जागरूक होने की जरूरत है।
- राजकुमार सिंह, उप आयुक्त परिवहन

सड़क सुरक्षा माह में ही 43 मौतें
जनवरी को सड़क सुरक्षा माह के रूप में मनाया गया, लेकिन हकीकत बेहद डरावनी रही। इन 30 दिनों में 43 से अधिक लोगों की मौत और 50 से ज्यादा लोग घायल हुए। असल आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा है, क्योंकि कई घायलों ने बाहर इलाज के दौरान दम तोड़ा।
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सभी रिकॉर्ड टूटे साल भर में 529 मौतें
वर्ष 2024 में जिले में 527 मौत सड़क हादसे में हुई थी। इसे देखते हुए प्रदेश के
मुख्य सचिव ने वर्ष 2025 के लिए सड़क हादसे रोकने को लेकर पांच बिंदुओं पर फोकस तय किया था। लेकिन इसके बावजूद सिर्फ पिछले साल 529 लोगों की जान चली गई। यह जिले में सड़क हादसे में 1 साल के अंदर अब तक हुई सबसे अधिक मौतें हैं।
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