बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि की चपेट में आकर जिले के करीब साढ़े चार लाख किसानों की गेहूं, सरसों आदि की खड़ी फसल खेतों में ही बर्बाद हो गई थी। कर्ज में डूबा किसान फसलों की बर्बादी देख आत्महत्या करने लगा था। जिस शासन ने सर्वे कराया था और जिला प्रशासन ने इसके लिए करीब 134 करोड़ रुपये की मांग की थी।
जिसके सापेक्ष महज 37 करोड़ रुपये ही जिले को मिले थे। जिसे किसानों को बांट भी दिया गया लेकिन अभी भी ढाई लाख किसान ऐसे हैं जो फसल नुकसानी के लाभ से वंचित हैं। जिले में करीब 25 किसानों ने फांसी लगाकर जान दे दी थी।
बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से जिले का तकरीबन 4 लाख किसान प्रभावित हुए थे। इसके लिए 134 करोड़ रुपये की मांग की गई थी। जिसमें करीब 37 करोड़ रुपये मिले था। जिसे किसानों में बांट दिया गया है। शासन से और बजट की मांग की गई थी। जितना बजट मांगा गया था यदि उतना मिल जाता है तो जिले के किसानों का संकट ही दूर हो जाएगा।
-हरिकेश चौरसिया, अपर जिलाधिकारी