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इकोफ्रेंडली मूर्तियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं मूर्तिकार

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बाराबंकी। कोरोना काल में आर्थिक संकट झेलने के बाद इस वर्ष मूर्तिकारों में उम्मीद जगी है। नवरात्र के उत्साह और रंग अभी से बाजार में दिखाई देने लगे हैं। मां दुर्गा की प्रतिमाओं को कलाकार अंतिम रूप देने में जुटे हैं। मां की मूरत को सुंदर आकार और नौ रूपों में बनाया जा रहा है। प्रतिमाओं के कारोबार में इस बार चमक दिखाई पड़ी है।
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देवी उपासना का पर्व नवरात्र को लेकर मूर्तिकार मां दुर्गा समेत अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। मां दुर्गा, भगवान शंकर, भगवान गणेश, कार्तिकेय, माता लक्ष्मी, हनुमान आदि प्रतिमाएं बनाई जा रही हैं। प्रतिमा पांच हजार रुपये से लेकर 20 हजार रुपये तक साइज के अनुसार मौजूद हैं।
प्रतिमाओं को विभिन्न रूपों में सजाया जा रहा है। मिट्टी के ही आभूषण पहनाएं गए हैं। इनमें प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल किया गया है। साथ ही कोलकाता से आर्टीफिशियल ज्वैलरी व वस्त्र मंगाए गए हैं। मूर्तिकार कपिल कुमार ने बताया कि इकोफ्रेंडली प्रतिमा बनाई जा रही है।
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यह प्रतिमा पूरी तरह पानी में घुल जाएगी। प्रतिमा बनाने में किसी भी तरह के केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया गया है। इसकी वजह पर्यावरण में प्रदूषण रोकना है। सभी प्रतिमाएं इकोफ्रेंडली हों, इसको ध्यान में रखा जा रहा है।
कोलकाता से बुलाए गए मूर्तिकार
नगर पालिका में होने वाली दुर्गा पूजा में लगने वाली मूर्तियों को बनाने के लिए विशेष रूप से कोलकाता से मूर्तिकार मनीष को बुुलाया गया है। कमला नेहरू पार्क के पीछे प्रतिमाएं बनाई जा रही हैं। मनीष अपने साथियों के साथ मां दुर्गा के नौ रूपों की प्रतिमाएं बना रहे हैं।
कई वर्षों से बना रहे हैं प्रतिमाएं
मूर्तिकार अंगद ने बताया कि वह करीब 30 साल से खैरातीपुर में रहकर प्रतिमा बना रहे हैं। लंबे समय से वह इस काम में जुटे हैं। पूरे साल वह सभी प्रकार की प्रतिमाओं का निर्माण करते हैं। इसी तरह वेदप्रकाश, सोनी, संतोष कुमार, कपिल कुमार, बृजलाल भी प्रतिमा बनाकर नवरात्र में बिक्री करते हैं।
कच्ची सामग्रियों के बढ़े दाम
मूर्तिकार वेदप्रकाश ने बताया कि प्रतिमाओं को तैयार करने में उपयोग आने वाली कच्ची सामग्रियों की कीमतें बढ़ी हैं। प्रमुख रूप से रंग, आर्टीफिशयल ज्वैलरी, रंगीन कपड़ों की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। इसके कारण प्रतिमाओं की कीमतों में भी इजाफा करना पड़ा है।
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