बाराबंकी में सोमवार को बेलहरा क्षेत्र में सूखा पड़ा मनरेगा का तालाब।
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अभी ठीक से गर्मी शुरू भी नहीं हुई है लेकिन जलसंरक्षण के लिए मनरेगा के तहत खोदवाए गए तालाब अभी से सूख गए हैं। इन तालाबों को बच्चों ने अपना खेल मैदान बना रखा है। इसमें मवेशी भी घर चरते हैं। तालाबों में उड़ रही धूल से लोगों को अभी से पेयजल संकट का डर सताने लगा है लेकिन विभाग व प्रशासन इन तालाबों में पानी भरवाने को लेकर गंभीर नहीं है।
इस बार काफी कम बरसात हुई। ठीक से ताल तलैया भी नहीं भर पाए। मनरेगा के तहत खोदवाए गए तालाब भी सही तरीके से रिचार्ज नहीं हो पाए। जिसका नतीजा रहा कि अभी से तालाब सूख गए हैं। मनरेगा के तहत खोदवाए गए तालाबों से भी पानी नदारद है। जिससे मवेशी तालाब में घास चरते हैं तो बच्चों ने इन तालाबों को खेल का मैदान बना लिया।
तालाबों के अप्रैल के शुरुआत में सूख जाने से पानी संकट की आशंका बढ़ गई है। पानी के अभाव में मवेशी व अन्य पशु पक्षी भी बेहाल होने लगे हैं। ग्रामीण रमेश यादव कहते हैं कि पहले अप्रैल में तालाबों में पानी भरा रहता था लेकिन अब हालात बिल्कुल बदले हैं। अभी से कस्बे का सेठनिया तालाब पूरी तरह सूखा पड़ा है।
ग्रामीण हेतराम कहते हैं इस बार बारिश काफी कम हुई जिसके चलते तालाब रिचार्ज भी नहीं हो पाए। ऐसे में इस बार पानी का स्तर काफी नीचे जाने की उम्मीद है। यदि ऐसा हुआ तो लोगों के सामने पेयजल का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।
ग्रामीण दिनेश यादव कहते है कि ताल तलैया अभी से सूखी हैं। ऐसे में इस बार मवेशियों के सामने भी पेयजल संकट रहेगा। पशुपालकों व ग्रामीणों को खासी परेशानी उठानी पड़ेगी। जलस्तर नीचे जाने हैंडपंप भी कम ही पानी दे रहे हैं। घघसी गांव का तालाब भी पानी की कमी से जूझ रहा है।
तालाब का थोड़ा बहुत पानी चंद दिनों में समाप्त हो जाने की आशंका है। इसके बाद यहां भी पानी की किल्लत बढ़ने की आशंका है। क्षेत्र के कई अन्य तालाब भी गत वर्ष पानी से न भर पाने के कारण अब गर्मी बढ़ने के साथ सूखे पड़े हैं लेकिन प्रशासन व जिला पंचायत विभाग मनरेगा के इन तालाबों में पानी भरवाने के प्रति गंभीर नहीं है।