अंबेडकरनगर। अकबरपुर के वैष्णोपुरम कॉलोनी में श्रीराम कथा के चौथे दिन शुक्रवार को राम जन्म प्रसंग का वर्णन किया गया। प्रवाचक जगजीवन पांडेय ने अयोध्या की पृष्ठभूमि, दशरथ के शासनकाल और राम अवतार की परिस्थितियों को क्रमबद्ध ढंग से प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि नेतृत्व और शक्ति का उपयोग हमेशा लोकहित के लिए होना चाहिए।
मर्यादा और अनुशासन से ही समाज में स्थायित्व आता है। त्रेता युग में जब पृथ्वी पर अधर्म, अन्याय और असंतुलन बढ़ने लगा, तब समाज को मर्यादा और न्याय का मार्ग दिखाने के लिए राम का जन्म हुआ। अयोध्या उस समय एक समृद्ध और सुव्यवस्थित नगरी थी, जहां शासन व्यवस्था न्याय और लोककल्याण पर आधारित थी। दशरथ के जीवन में संतान न होने की पीड़ा और उसके समाधान के लिए किए गए यज्ञ का प्रसंग भी कथा में शामिल रहा। यज्ञ के फलस्वरूप राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न का जन्म हुआ, जिसने अयोध्या के साथ पूरे समाज में नई चेतना का संचार किया। राम ने अपने जीवन से यह स्थापित किया कि सत्ता और शक्ति का उपयोग केवल लोकहित के लिए होना चाहिए।