बाराबंकी। क्लासरूम की चारदीवारी हो या खेल का मैदान, छात्रों को नशे के धीमे जहर से बचाने के लिए प्रशासन ने फुलप्रूफ कार्ययोजना तैयार की है। अब स्कूलों से नशे की लत को खत्म करने के लिए मजबूत घेराबंदी होगी। जिससे सीधे जमीनी स्तर पर एक्शन दिखेगा। इसके लिए स्कूलों में विशेष नशा विरोधी अभियान संचालित करने के साथ ही जागरूकता क्लब भी गठित किए जाएंगे।
विद्यार्थियों को दैनिक दिनचर्या से जोड़ने के लिए माध्यमिक शिक्षा परिषद की किताबों के मुख्य कवर पेज पर नशा विरोधी अलर्ट और इससे होने वाले नुकसान के संबंध में चेतावनी भी छापी जाएंगी, ताकि किताब खोलते ही बच्चों को सही रास्ता दिखे। नार्को समन्वय केंद्र (एनसीओआरडी) की हाई-लेवल बैठक में मिले निर्देशों के बाद जिले में नशा माफिया और भटके हुए युवाओं के लिए इस विशेष कार्ययोजना का खाका तैयार किया गया है।
21 अगस्त तक जिले के सभी सरकारी, एडेड और प्राइवेट स्कूलों में एक साथ स्पेशल जागरूकता अभियान की शुरूआत होगी। इसका मकसद केवल पाबंदी लगाना नहीं, बल्कि छात्रों को खुद इस सामाजिक बुराई के खिलाफ एक मजबूत ढाल बनाना है। जागरूकता के लिए हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के सिलेबस में नशे के जानलेवा दुष्प्रभावों को प्रमुखता से शामिल किया गया है। साथ ही विद्यालयों में विशेष ड्रग अवेयरनेस क्लब भी गठित किए जा रहे हैं।
अक्सर देखा जाता है कि स्कूलों, कोचिंग सेंटरों और हॉस्टलों के आसपास सुनसान स्पॉट्स पर नशे का नेटवर्क पनपता है। प्रशासन ने ऐसे संदिग्ध ठिकानों का पूरा ब्यौरा तैयार कर रहा है। ऐसी जगह मिलने वाले युवाओं को चिह्नित कर उनकी काउंसिलिंग कर उन्हें नशे की लत से दूर रहने का पाठ पढ़ाएगा।
कोट्स
शासन और एनसीओआरडी के निर्देश के तहत पूरे जनपद के विद्यालयों में नशा विरोधी अभियान कड़ाई से लागू कराया जा रहा है। इसका प्राथमिक उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित माहौल देना और सही दिशा दिखाना है। किसी भी स्कूल या आसपास संदिग्ध गतिविधि मिलने पर पुलिस व एएनटीएफ के सहयोग से कानूनी कार्रवाई होगी।
-अमिता सिंह, डीआईओएस