बाराबंकी। सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों की तरह हाईटेक बनाने के लिए बनाई गई एक महत्वपूर्ण योजना लापरवाही की भेंट चढ़ गई। एक साल पहले शासन ने जिले के 493 पूर्व माध्यमिक विद्यालयों को चयनित कर उनमें स्मार्ट क्लास का संचालन शुरू करने की पहल की थी। तैयारी बड़ी तेजी से शुरू हुई थी मगर अब दूसरा शिक्षा सत्र का भी डेढ़ माह बीतने को है स्मार्ट क्लास की फाइलें जिले से लेकर ब्लॉक स्तर पर धूल फांक रही हैं। शासन से न बजट मिला है न कोई निर्देश।
जिले में 1792 प्राथमिक विद्यालय, 475 पूर्व माध्यमिक विद्यालय व 369 कंपोजिट विद्यालय संचालित हैं। इनमें से 75 प्राथमिक विद्यालय में पहले से ही स्मार्ट क्लास का संचालन शुरू किया गया था। लेकिन शासन ने एक साल पहले कक्षा छह से आठ तक की शिक्षा देने वाले पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में भी स्मार्ट क्लास के संचालन को लेकर योजना बनाई थी। इसे लेकर जिले का सर्वे करने के बाद 493 पूर्व माध्यमिक विद्यालयों को चयनित किया गया।
शासन ने इन विद्यालयों में स्मार्ट क्लास संचालन की मंजूरी दे दी थी। इन विद्यालयों को स्मार्ट टीवी, प्रोजेक्टर व अन्य उपकरण उपलब्ध कराया जाना था। शासन से निर्देश मिलने के बाद जिले स्तर पर स्कूलों का सत्यापन हुआ। लेकिन इसके बाद यह कवायद ठंडे बस्ते में चली गई। बजट के अभाव में पिछले साल स्मार्ट क्लास का संचालन नहीं शुरू हो पाया। मनाया जा रहा था कि इस शिक्षा सत्र से स्कूलों में स्मार्ट क्लास के लिए विशेष पहल होगी। लेकिन नए शिक्षा सत्र के भी डेढ़ माह से अधिक का समय बीत गया है।
बताते हैं कि इस प्लान की फाइलें बेसिक शिक्षा विभाग में धूल फांक रही हैं। यदि इन स्मार्ट क्लास का संचालन शुरू हो जाता तो 50 हजार से अधिक नौनिहालों को इसका लाभ मिलता। अभिभावकों ने जब यह जानी तो उन्होंने काफी उम्मीदें लगा रखी थी मगर अब वह भी बार-बार शिक्षकों से इसके बारे में पूछ रहे हैं और शिक्षकों के पास कोई जवाब नहीं है।
ऐसे होती है स्मार्ट क्लास
स्मार्ट क्लास का मतलब डिजिटल यानी ऑनलाइन कक्षा। इसके लिए विद्यालय में बिजली का कनेक्शन होने के साथ ही स्मार्ट टीवी, प्रोजेक्टर, कंप्यूटर, सीपीयू, रिमोट आदि की आवश्यकता होती है। बच्चों की बैठने की व्यवस्था भी बेहतर होनी चाहिए। स्मार्ट क्लास का सबसे बड़ा फायदा यह है कि विद्यार्थियों की अध्ययन सामग्री व कोर्स भी कम्प्यूटर में लोड रहता है।
बजट मिलने की उम्मीद
स्मार्ट क्लास के लिए चयनित किए गए 493 पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में संसाधन जुटाने के लिए शासन से बजट मिलना बाकी है। जल्द ही बजट मिलने की उम्मीद है।
- संतोष देव पांडेय, बीएसए