बाराबंकी। वर्ष- 2009 में दर्ज गैंगस्टर एक्ट के एक पुराने मामले में अदालत ने छह आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है। जबकि दो की विचारण के दौरान मृत्यु हो चुकी है। अपर सत्र न्यायाधीश व विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट) असद अहमद हाशमी की अदालत ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि सिर्फ मुकदमे का पंजीकृत होना ही अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
यह मुकदमा शहर कोतवाली में तत्कालीन कोतवाल कपिल देव मिश्र द्वारा दर्ज कराया गया था। आरोप था कि वर्ष 2009 में बदोसराय निवासी तौफीक, बड़ेल निवासी मुजम्मिल, घोसियाना निवासी हारून, देवा रोड के दिलीप, शहर निवासी सरताज, छोटे, ताज मोहम्मद और अशोक कुमार सहित अन्य लोगों ने एक गिरोह बनाकर आर्थिक व भौतिक लाभ के लिए कब्रिस्तान रोड के किनारे स्कॉर्पियो वाहन में बैठकर जुआ खिलाने का काम किया। इसके अलावा गुंडा टैक्स मांगने का भी एक मामला दर्ज हुआ था। लंबे विचारण के दौरान आरोपियों हारून और तौफीक की मृत्यु हो गई, जबकि शेष अभियुक्तों ने अपने को निर्दोष बताते हुए कहा कि उनके विरुद्ध लगाए गए सभी आरोप झूठे हैं और वे पहले ही अन्य मामलों में बरी हो चुके हैं। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि अभियोजन पक्ष पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत करने में असफल रहा। इसके आधार पर अदालत ने सभी अभियुक्तों को दोषमुक्त कर दिया।