बाराबंकी। यात्रियों की सुविधा के लिए शहर में नया बस स्टेशन बनाया गया। इसके बावजूद यहां बसों का ठहराव न होने से सन्नाट पसरा रहता है। बस चालक स्टेशन की जगह हाईवे पर ही सवारी उतार कर व बैठाकर आगे निकल जाती हैं। इससे गंतव्य तक जाने के लिए लखनऊ-अयोध्या मार्ग चौपुुला पर यात्रियों को धूप और तपिश में बसों का इंतजार करने की परेशानी उठाना पड़ रही है। कमोबेश ऐसा ही हाल रामनगर और हैदरगढ़ बस अड्डे का भी है। फतेहपुर का बस स्टेशन तो किराये के भवन में चल रहा है। रामसनेहीघाट में बस स्टेशन का निर्माण कार्य अभी तक पूरा नहीं हो सका है।
रामनगर के बुढ़वल चौराहे पर लाखों की लागत से बनाया गया बस स्टॉप निष्प्रयोज्य बना दिखता है। यहां बसों का ठहराव न होने से यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। लखनऊ, गोंडा, बहराइच जाने वाली परिवहन विभाग की बसें बस स्टेशन की जगह हाईवे पर से ही होकर निकल जाती है। इससे तेज धूप में यात्रियों को हाईवे के किनारे खड़े होकर बसों का इंतजार करना पड़ता है।
देवा में भी बस स्टेशन तो बना है लेकिन यह सिर्फ 10 दिनों के लिए संचालित होता है। मेला आने से पूर्व परिवहन निगम इसके रंग रोगन और मरम्मत पर लाखों रुपये खर्च करता है और देवा मेला के बाद इसकी हालत फिर से बदहाल हो जाती है। ऐसे ही हैदरगढ़ बस स्टेशन को करोड़ों रुपए की लागत से बनाया गया लेकिन कर्मचारियों की कमी के कारण इसका फायदा यात्रियों को नहीं मिल पा रहा है। लखनऊ जाने के लिए भी यहां से कोई बस आसानी से नहीं मिलती है।
बस स्टेशन पर बैठने के साथ अन्य मूलभूत सुविधा न होने से यात्रियों को बस पकड़ने के लिए सड़क किनारे खड़े होकर ही बसों का इंतजार करना पड़ता है। जबकि किराए के भवन में चल रहे फतेहपुर बस स्टेशन पर भी यात्री सुविधाओंं का अभाव है। रामसनेही घाट में कई वर्षों से बन रहे बस अड्डे का निर्माण कार्य भी जिम्मेदारों की लापरवाही से अधूरा पड़ा है। ऐसे में लोगों को गंतव्य तक पहुंचने के लिए डग्गामार या अन्य वाहनों का सहारा लेना पड़ता है। इस संबंध में एआरएम जमीला खातून का कहना है कि यात्री सुविधाओं को बढ़ाने का प्रयास करने के साथ ही बस चालकों की मनमानी पर भी लगाम कसी जा रही है।