संग्रामपुर। मल्लूपुर गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन रविवार को प्रवाचक आचार्य श्रीमहाराज ने कहा कि भागवत कथा मानव को विचार, वैराग्य, ज्ञान और भगवान से मिलने का मार्ग दिखाती है। समाज के बनाए नियम बदल सकते हैं, लेकिन भगवान के नियम कभी गलत नहीं होते और न ही बदले जा सकते हैं।
प्रवाचक ने कहा कि मानव जीवन अनमोल है। मनुष्य को अपने जीवन का उद्देश्य समझते हुए उसे प्रभु के चरणों में समर्पित कर देना चाहिए। प्रवाचक ने कहा कि भगवान मानव की अपनी भूलों को क्षमा कर सकते हैं, लेकिन संतों के प्रति किए गए अपमान के दुष्परिणाम से बचाना कठिन होता है। भागवत कथा सुनने वालों का भगवान हमेशा कल्याण करते हैं। भगवान से मिलने का उद्देश्य बनाकर उनके बताए मार्ग पर चलने से ही जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति संभव है। इस अवसर पर सभाजीत शुक्ल, सदाशिव पांडेय, बृजेश मिश्र, राधेश्याम शुक्ल और तीर्थराज शुक्ल आदि श्रद्धालु मौजूद रहे।