बाराबंकी। जिले में डॉक्टरों की भारी कमी है, जिससे सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों खासकर बच्चों को इलाज की सुविधा नहीं मिल पा रही है। इसके चलते तीमारदार बच्चों का निजी अस्पतालों में महंगा इलाज कराने को मजबूर हैं। वहीं मौसम में आए बदलाव का ही नतीजा है कि बच्चे भी सर्दी, जुकाम और बुखार की चपेट में आने लगे हैं।
जिले में 21 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित हैं। यहां पर डॉक्टरों के पदों की संख्या 244 है, परंतु मौजूदा समय में 160 डॉक्टर ही इन अस्पतालों में तैनात हैं। मौसम में आए बदलाव के चलते अस्पतालों में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इनमें बच्चे भी शामिल हैं, परंतु ज्यादातर सीएचसी पर बच्चों के डॉक्टर न होने के कारण तीमारदार नौनिहालों को इलाज निजी अस्पतालों में कराने को मजबूर हैं। क्योंकि सरकारी अस्पतालों में बच्चों के डाॅक्टरों की संख्या करीब आठ बताई जा रही है। सीएमओ डॉ. अवधेश यादव का कहना है कि डॉक्टरों की कमी से उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है और इसके लिए कई पत्र भी लिखे गए हैं।
मौसम में बदलाव से रहें सावधान
जिला अस्पताल में तैनात चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर राजेश कुशवाहा का कहना है कि मौसम तेजी से बदल रहा है। दिन में जहां धूप निकल रही है, वहीं सुबह-शाम ठंड हो रही है। ऐसे में जरा सी भी लापरवाही आपकी सेहत पर भारी पड़ सकती है। इसलिए घर से बाहर निकलें तो गर्म कपड़े जरूर पहनें और शरीर को पूरी तरह से ढक कर रखें। किसी भी प्रकार की दिक्कत होने पर तुरंत चिकित्सक की सलाह लें। एसीएमओ डाॅ. राजीव दीक्षित कहते हैं कि बदले मौसम में बच्चों का विशेष ख्याल रखने की जरूरत है। बच्चों को ठंड से पूरी तरह से बचाकर रखें। गर्म कपड़े पहनाएं, घर से बाहर न निकलेें और पौष्टिक आहार दें। दिक्कत होने पर तत्काल चिकित्सक की सलाह लें।