बाराबंकी। करीब साढ़े तीन लाख की आबादी वाला बाराबंकी शहर। राजधानी लखनऊ के करीब होने के कारण पूर्वांचल का द्वार भी माना जाता है। 20 से 25 हजार लोग रोजाना शहर में कोर्ट, कचहरी, खरीदारी, रेल व बस पकड़ने के साथ व्यावसायिक काम के लिए पहुंचते हैं। मगर शहर पहुंचते ही उन्हें कदम-कदम पर जाम झेलना पड़ता है।
चारों ओर बेतरतीब व बिना प्लान के दौड़ रहे ई-रिक्शा व वाहन, सड़कों पर अतिक्रमण व यातायात पुलिसकर्मियों की कमी के कारण जाम शहर की लाइलाज बीमारी बन गया है। शनिवार को जाम को लेकर पड़ताल की गई तो कुछ ऐसा ही सामने आया। सीओ यातायात आलोक कुमार पाठक ने कहा कि शहर में यातायात व्यवस्था को लेकर नियमों को पालन कराने के लिए अभियान चलाया जाएगा। बे-रूट दौड़ रहे वाहनों पर कार्रवाई हाेगी। सड़क पर अतिक्रमण करने वाले दुकानदारों पर केस दर्ज कराया जाएगा।
सड़क पर दुकानें व खड़े वाहन, रेंगते रहे राहगीर
नाका सतरिख से गल्ला मंडी होते हुए धनोखर चौराहे तक की सड़क के दोनों किनारों पर खुली 70 से अधिक दुकानों का सामान सड़क पर रखा था। सड़क किनारे बाइकें खड़ी थीं। जो लोग बाइक से आ गए थे वे फंसे थे। लोग रेंग रहे थे। यह रोज का हाल है।
घोसियाना मार्ग पर कदम-कदम पर जाम
पुलिस लाइन चौराहे से मुख्य शहर के अंदर जाने वाले घोसियाना मार्ग पर कदम-कदम पर जाम मिला। घोसियाना में बिजली कार्यालय, दवा की दुकानें, जांच केंद्रों पर आने वाले हजारों लोग जाम में फंसे रहे। फुटपाथ पर वाहन खड़े कर लोग गायब थे। यहां एक यातायातकर्मी तक तैनात नहीं है।
संकरा पुल, 20 हजार वाहन, जाम यहां आम
बाराबंकी से देवा जाने वाला मार्ग का नाम आते ही जेहन में जाम कौंध पड़ता है। इस सड़क से गुजरने वाली दो रेलवे क्राॅसिंगों के ऊपर पुल का निर्माण तो हुआ मगर इस सड़क से रोजाना 20 हजार वाहन गुजर रहे हैं। पुल संकरा साबित हो रहा है। शनिवार को दिन भर जाम के हालात रहे।
मुख्य बाजार : फंस गए तो निकलना मुश्किल
शहर के निबलेट तिराहे से धनोखर व धनोखर से घंटाघर होते हुए सट्टी बाजार तक मुख्य बाजार मानी जाती है। हर प्रकार की हजारों दुकानें यहां हैं। अब त्योहार के मौसम में इस बाजार में घुस गए तो निकलना मुश्किल हो जाता है। इसी जाम में ई-रिक्शा, ऑटो, मालवाहन के कारण घंटाघर से निबलेट तक की करीब 500 मीटर की दूरी आधा घंटा में तय होती है।