बाराबंकी। जिले में बेसहारा गोवंश पशुओं को आश्रय देने के लिए 123 गो-आश्रय स्थल संचालित हैं। कागजों पर इन आश्रय केंद्रों पर 29 हजार से अधिक पशु रखे जा रहे हैं। लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल इतर है। अधिकांश पशु आश्रय न मिलने के कारण गांवों व हाईवे पर बेसहारा घूमने को विवश रहते हैं। जिला मुख्यालय पर नगर की सड़कों और गलियों से लेकर लखनऊ-अयोध्या, बाराबंकी-बहराइच हाईवे पर पशुओं का जमावड़ा कभी भी देखा जा सकता है। अधिकांश जगह यह बेसहारा पशु सड़क हादसों का कारण भी बनते हैं।
शहर में स्टेशन रोड, देवा रोड, छाया चौराहा और हाईवे पर बेसहारा पशुओं के झुंड देखे गए। सुबह टहलने वाले लोग इन छुट्टा घूमने वाले बेसहारा पशुओं से लोग परेशान रहते हैं। नगर में छुट्टा घूमने वाले पशुओं की संख्या करीब तीन सौ से ज्यादा है। लेकिन मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अतुल कुमार अवस्थी का कहना है कि कोई भी बेसहारा पशु सड़कों पर नहीं है। सभी को गो आश्रय स्थलों में रखकर संरक्षण दिया जा रहा है।
सतरिख नगर पंचायत में लगभग 50 बेसहारा पशु दिन-रात घूमते नजर आते हैं। जबकि आश्रय स्थल में मात्र 19 पशु हैं। इसी तरह बंकी, हैदरगढ़, रामसनेहीघाट, सुबेहा, दरियाबाद, रामनगर, देवा, फतेहपुर आदि स्थानों पर भी बेसहारा पशु सड़कों व खेतों में दिखाई देते हैं।