- 32 साल पुराने मामले में अदालत ने सुनाया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
बाराबंकी। अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट राकेश कुमार ने अपहरण व जान से मारने की नीयत से पीड़िता को नहर में फेंकने के 32 साल पुराने मुकदमे में एक अभियुक्त को दोषी ठहराते हुए सात वर्ष की कैद व 10000 जुर्माने की सजा सुनाई है।
सहायक शासकीय अधिवक्ता शैलेंद्र कुमार श्रीवास्तव के अनुसार थाना मसौली क्षेत्र के एक ग्राम निवासी व्यक्ति की बहन (14) 27 नवंबर 1991 की शाम घर से गायब हो गई थी। उसी दिन से बेरिया ग्राम निवासी सजीवन व अर्जुन भी घर से गायब मिले। 9 दिसंबर 91 को थाना बड्डूपुर के ग्राम बुढ़ना निवासी रामजियावन ने वादी को बताया कि उसकी बहन के नाम की एक किशोरी को गांव के पास शारदा नहर में रात में डूबने से बचाया गया है जो ग्राम बुढ़ना में मौजूद है। वादी व परिजनों के वहां पहुंचने पर पीड़िता ने बताया कि सजीवन तथा अर्जुन निवासी ग्राम बेरिया बहला-फुसलाकर लाए थे। इसके बाद सजीवन डडियामऊ गांव निवासी भगोती से शादी करने का दबाव बनाने लगा। पीड़िता के मना करने पर सजीवन ने उसे जान से मारने की नीयत से गला पकड़ कर शारदा नहर में फेंक दिया था। चिल्लाने पर गांव वालों ने उसकी जान बचाई थी। घटना की रिपोर्ट पीड़िता के भाई ने दर्ज कराई थी। 8 मार्च, 2002 से सजीवन फरार चल रहा था। उसके न आने पर 6 माह बाद उसकी फाइल अलग कर दी गई थी। कोर्ट की सख्ती के बाद 20 फरवरी 2023 को अभियुक्त सजीवन को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। न्यायाधीश ने सजीवन को 7 वर्ष की कैद व 10000 जुर्माने की सजा सुनाई है। दो अन्य आरोपियों के मामले का निस्तारण 18 फरवरी 2005 में किया जा चुका है।