कुर्सी थाना क्षेत्र में ग्राम मीरनगर बनौगा के पास एक स्लाटर हाउस से मवेशियों का खून व अवशेष रेठ नदी में बहाया जा रहा है। नदी को कई अन्य जगह पर गंदा किया जा रहा है। इससे नदी में मछलियां मर गई हैं।
इन सबके बावजूद प्रशासन द्वारा रेठ नदी के प्रदूषण नियंत्रण के लिए कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है। हद तो तब हो गई जब बीते छह अप्रैल को नदी के पानी का सैंपल लिया गया और उसकी जांच रिपोर्ट में पानी को स्वच्छ बता दिया है। वहीं नदी के आसपास के रहने वाले लोगों के घरों के नलों से भी दूषित पानी निकलने पर पेयजल की समस्या खड़ी हो गई है।
जिल में घाघरा, कल्याणी, रेठ तीन नदियां हैं। जिसमें रेठ नदी सबसे ज्यादा प्रदूषित है। हाल ही में जिले की एक संस्था द्वारा गोमती और उसकी सहायक नदियों को स्वच्छ बनाने के लिए यात्रा निकाली गई।
इसके बाद भी रेठ नदी को स्वच्छ बनाने के लिए कोई ठोस पहल नहीं हो सकी। अमरून फैक्ट्री में कटने वाले मवेशियों का खून व उनका अवशेष मीर नगरबनौगा के पास रेठ नदी में बहाया जा रहा है। जिससे यहां का पानी काला हो गया है।
इससे नदी में मछलियां मर गईं हैं। मवेशी तक नदी का पानी नहीं पीते। नदी में फैक्ट्री द्वारा छोड़ी जा रही गंदगी के चलते उठने वाली दुर्गंध से आस-पास के ग्रामीणों का जीना मुहाल है। ग्राम उमरा के पास सोना गोल्ड फैक्ट्री मुर्गी दाना बनाती है, इसका गंदा पानी भी नदी में छोड़ा जा रहा है।
जमुरिया में भी गिरता था पालिका बूचड़खाने का पानी
शहर के बीच निकला जमुरिया नाला (जुबली रीवर) में शहर के गंदे पानी के अलावा नगर पालिका क्षेत्र के पीरबटावन स्थित बूचड़ खाने में कटने वाले मवेशियों का खून व अवशेष बहाए जाते थे। जून 2005 में पर्यावरण प्रदूषण टीम ने पानी का नमूना लिया था, जिसमें पानी दूषित मिला था। टीम ने जिलाधिकारी को पत्र लिख बूचड़ खाने को आबादी से दूर किए जाने को कहा था। जमुरिया का दूषित पानी आगे जाकर रेठ नदी को भी दूषित कर रही है।
रेठ नदी का पानी दूषित तो है ही, प्रदूषण स्तर की जांच के लिए हाल ही में पानी का नमूना भरा गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। जब तक जिला प्रशासन का सहयोग नहीं मिलेगा, नदी को प्रदूषण मुक्त नहीं किया जा सकता है। -चंद्रेश कुमार सिंह, प्रदूषण नियंत्रण प्रकोष्ठ जिला समन्वयक