संत शिरोमणि रविदास की जयंती के मौके पर सोमवार को शहर में रंग-बिरंगी झांकी के साथ शोभा यात्रा निकाली गई। झांकियों के साथ बैंडबाजे की धुन पर युवक, युवतियां व महिलाएं झूमते हुए चल रहे थे। जगह-जगह शोभा यात्रा का स्वागत किया गया।
मोहल्ला कानून गोयान से शुरू हुई शोभा यात्रा में संत रविदास के जीवन पर आधारित तरह-तरह की झांकियां सजाई गईं। ये झांकियां लोगों में आकर्षण का केंद्र रहीं। शोभा यात्रा में आजाद नगर, सिद्धार्थनगर, पीरबटावन सहित कई मोहल्लों की झांकियां शामिल र्हुईं।
नगर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी इस शोभा यात्रा का शहर में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने स्वागत किया। इसके बाद यात्रा मोहल्ला पैसार सिद्धार्थनगर पहुंच कर यात्रा सभा के रूप में परिवर्तित हो गई। सभा में मनोज कुरील ने संत रविदास के जीवन के संबंध में लोगों को विस्तार से बताया। कहा कि संत रविदास के समय में स्त्री और दलितों की हालत बद से बदतर थी।
ऐसे समय में संत रविदास ने समाज को इन बुराइयों के खिलाफ अलख जगाने की पहल की। संत रविदास ने लोगों को बताया था कि जन्म से नहीं कर्म से ही इंसान महान होता है। उसी समय धर्मों में फैल रहे पाखंड व अंध विश्वास का उन्होंने कड़ा विरोध किया।
उन्होंने दान दक्षिणा की बजाय मेहनत करके अपने परिवार का भरण पोषण का संदेश दिया। इस मौके पर रमेश चन्द्र कुरील, मथुरा प्रसाद, शत्रोहनलाल, प्रेमकुमार, राधेश्याम डॉ. राजारामए पवन कुमार कुरील, रक्षक कुरील, राहुल बाथम, अनन्तराम वर्मा, अमरीश कुरील, धीरज कुरील, रामकुमार गौतम, मुकेश गौतम, दीपू, अंकित, परमेश्वरए पंकज, छत्रपाल गौतम, मुन्ना गौतम मौजूद थे।