रामनगर। स्थानीय कस्बे की रामलीला ढाई सौ साल का इतिहास समेटे है। रामनगर धमेड़ी राज घराने की मालकिन रानी मृणालिनी मौजूदा समय आयोजन की जिम्मेदारी निभा रही हैं। इनके पहले कुंवर राजा रत्नाकर सिंह व उनसे पहले उनके पिता व बाबा ने आयोजन को भव्यता प्रदान की। समय से साथ बढ़ती महंगाई के कारण राम लीला के मंचन का खर्च भी बढ़ता गया।
वर्तमान में इसके आयोजन पर लाखों का खर्च आता है। राज घराने की मदद से आयोजन को परंपरागत तौर तरीकों के साथ आयोजित किया जा रहा है। पहले रामलीला राजा के कोठी परिसर में होती थी, लेकिन बाद में रामनगर के पक्का तालाब के किनारे हनुमान मंदिर परिसर में इसका आयोजन किया जाने लगा है।
बुजुर्ग चंद्र प्रकाश चौरसिया बताते हैं कि लोधेश्वर महादेव की इस धरती पर पहले कानपुर के कलाकारों द्वारा रामलीला का मंचन किया जाता था, लेकिन अब स्थानीय कस्बे के लोगों ने उनके साथ रहकर मंचन करना सीख लिया है। करीब सौ साल से स्थानीय कलाकार ही रामलीला का मंचन करते आ रहे हैं। पीढ़ी दर पीढ़ी रामलीला में अभिनय करने का सिलसिला भी जारी है।
पिता के बाद अब बेटा बनता है रावण
कस्बे चंचरीक तिवारी रावण का रोल लेते थे, अब उनके बेटे राकेश तिवारी रावण का अभिनय कई साल से कर रहे हैं। इसी तरह अन्य कलाकार भी परंपरागत तौर पर अपनी-अपनी भूमिका निभा रहे हैं। इस बार हनुमान का अभिनय ओमकार नाथ त्रिवेदी, श्रीराम का सौरभ तिवारी, लक्ष्मण-ओम त्रिवेदी, भरत-अंशुल तिवारी, शत्रुघ्न-कार्तिकेय पांडेय, अंगद-साकेत तिवारी, सुग्रीव-विजय मौर्य,वशिष्ठ-गिरजा शंकर,मेघनाद-सत्यम तिवारी व नारद मुनि का अभिनय पूरन तिवारी करेंगे।