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कटान रोकने गए अधिकारियों को ग्रामीणों ने खदेड़ा

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कोटवाधाम (बाराबंकी)। तेलवारी के निकट हो रही कटान रोकने पहुंचे बाढ़ खंड के अधिकारियों को ग्रामीणों के कोप का शिकार होना पड़ा। विवाद इतना ज्यादा बढ़ गया कि ग्रामीणों ने अधिकारियों को मौके से खदेड़ दिया। अधिकारियों ने इसकी सूचना एडीएम और एसडीएम को दी।
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एसडीएम के आदेश पर मौके पर पुलिस और पीएसी तैनात कर कटान रोकने का कार्य कराया जा रहा है। शुक्रवार को मामले की हकीकत जानने के लिए तहसीलदार श्रद्धा चौधरी भी पहुंचीं और कार्य करा रहे अधिकारियों को कार्य में और तेजी लाने के निर्देश दिए।
सिरौलीगौसपुर क्षेत्र में सरयू नदी के किनारे बसे तेलवारी गांव के पास हो रही कटान रुकने का नाम नहीं ले रही है। कटान रोकने के लिए हजारों ट्रॉली पक्की ईंट नदी में डालने के बाद भी कटान रुकने के आसार नहीं दिख रहे हैं। गुरुवार की देर शाम कटान रोकने के लिए बाढ़ खण्ड के अधिकारी मौके पर पहुुंचे तो ग्रामीणों का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया और देखते ही देखते अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच विवाद होने लगा।
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बात इतनी ज्यादा बढ़ गई कि ग्रामीणों ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को वहां से खदेड़ दिया। अधिकारियों ने इसकी सूचना एडीएम और एसडीएम को दी। अधिशासी अभियंता बाढ़ एसके सिंह ने बताया कि कटान रोकने के लिए जब अधिकारी तेलवारी गांव पहुंचे तो ग्रामीण अधिकारियों से भिड़ गए और कार्य नहीं करने दिया। जिसकी सूचना एसडीएम और एडीएम को दी गई है।
एसडीएम के आदेश पर पुलिस और पीएसी तैनात कर कटान रोकने का कार्य कराया जा रहा है। वहीं बाढ़ खण्ड द्वारा कराए जा रहे कार्यों का निरीक्षण करने शुक्रवार को तहसीलदार श्रद्धा चौधरी मौके पर पहुंची और हकीकत जानी। उन्होंने लोगों से सहयोग करने की बात करते हुए कहा कि जिन लोगों के घर कट रहे हैं, वह उन्हें खाली कर सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं।
करोड़ों की परियोजना भी नहीं रोक पा रही कटान
तराई में बसे गांव को बचाने के लिए सरकार ने करोड़ों की लागत से चार परियोजनाएं शुुरू की गई थी। विभाग का दावा है कि इन परियोजनाओं का कार्य पूरा हो गया। ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारियों ने इन कार्यों में जमकर लापरवाही बरती जिसकी वजह से नदी आए दिन कटान करने लगती है। यदि सही से कार्य कराया गया होता तो यह नौबत न आती। वहीं काम में लगी ईंट भरी एक ट्रॉली पलट गई लेकिन गनीमत रही की कार्य कर रहे श्रमिक बाल-बाल बच गए।
रसूख के चलते कई वर्षों से गृहजनपद में तैनात है चार जेई
जिले का बाढ़ खंड एक ऐसा विभाग है जहां पर प्रतिवर्ष करोड़ों का बजट तराई की जनता को बाढ़ से बचाने के लिए आता है। इस वर्ष भी करीब चार परियोजनाएं शासन स्तर से स्वीकृत हुईं और करीब 33 करोड़ रुपये इन परियोजनाओं पर कार्य कराने के लिए मिला।
सूत्रों की मानें तो मलाईदार विभाग होने की वजह से चार ऐसे जेई (अवर अभियंता) अंकित, शैलेश, भूपेंद्र और अजय कुमार यहां पर कार्यरत हैं जो चार वर्षों से अधिक समय से विभाग में तैनात हैं। लेकिन इन्हें जिले से हटाने का साहस कोई नहीं कर पा रहा है क्योंकि इनकी पहुंच और रसूख के आगे शासन में बैठे अधिकारी भी खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं। इस बाबत अधिशासी अभियंता एसके सिंह का कहना है कि जिले में कौन कब से तैनात इसकी सूचना समय-समय पर शासन को भेज दी जाती है।
तराई क्षेत्र में हो रही कटान को रोकने का कार्य बाढ़ खंड द्वारा कराया जा रहा है लेकिन ग्रामीण इसका विरोध कर रहे हैं। इसकी वजह से पुलिस व पीएसी को निर्देश दिए गए हैं और तहसीलदार को मौके पर जांच के लिए भेजा गया है। जिन लोगों के मकान कटान की जद में आए हैं उन्हें तहसील प्रशासन की ओर से मदद मुहैया कराई जा रही है। कटान पर प्रशासन बराबर नजर रखे हुए है।
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-सुरेन्द्र पाल विश्वकर्मा, एसडीएम सिरौलीगौसपुर
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