बाराबंकी के जैदपुर में शिया समुदाय द्वारा निकाले जा रहे जुलूस में मातम करते अकीदतमंद।
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रज्जब को हजरत इमाम हसैन व सफर मदीना से कर्बला की याद में कस्बे की पचदरी मस्जिद से मातम का जुलूस निकाला गया। जुलूस से पहले सुबह मजलिस को मौलाना ने इमाम हुसैन के सफ र के बारे में खिताब किया। सफ र मदीना का जुलूस कस्बे से होता हुआ कार्बला में जाकर अलविदाई मजलिस के बाद समाप्त हुआ।
कस्बा जैदपुर में हर वर्ष शिया समुदाय के लोग हजरत इमाम हुसैन व उनके साथियों की याद में मदीना से कर्बला जाने को लेकर मातम व अलम का जुलूस निकालते हैं। जिसमें ऊंट, घोड़ों को परम्परागत तरीके से सजाया जाता है।
मोहल्ला चिकना महल की पचदरी मस्जिद से निकलने वाले जुलूस की मजलिस को सुबह मौलाना सैय्यद जमीरूल हसन साहब ने खिताब करते हुए सफ र मदीने के सिलसिले पर रोशनी डालते हुए कहा कि हजरत इमाम हुसैन ने सिर्फ इस्लाम की अच्छी बातों को फैलाने के लिए अपना वतन छोड़कर कर्बला का सफर अपने साथियों के साथ निकले थे। लोगों को हजरत इमाम हुसैन से जिंदगी गुजारने के साथ इस्लाम पर चलने की हिदायत लेनी चाहिए।
मजलिस के बाद सफ र मदीना का जुलूस मोहल्ला छोटा इमाइ बाड़ा, जैलमहल, छोटी बाजार, मुक्खिन, बड़ी सरकार, बाजार होते हुए कर्बला पहुंचा। जिसमें मासूम बच्चों से लेकर युवक व बुजुर्ग सभी जंजीरी मातम कर शहादत दे रहे थे। जुलूस में अन्जुमन फनाफिल हुसैन बहराइच व अन्जुमन हाशमीया इलाहाबाद नोहाख्वानी पढ़ रही थी।
शबीहे कर्बला की अलविदाई मजलिस को मौलाना सैय्यद तस्नीम मेंहदी साहब जैदपुरी ने खिताब किया। जिसको सुनकर वहां मौजूद अकीदतमंद जोर-जोर से रोने लगे। हर वर्ष निकलने वाले इस जुलूस का आयोजन कस्बे की तन्जीम दस्ते हैदरी हर बार करती है।