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Barabanki News: कैदियों ने की खेती तो रच दिया इतिहास, विशेषज्ञ भी दंग

Mon, 26 Feb 2024 01:58 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
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बाराबंकी। अपराध से सने हाथों ने जब खेती संभाली तो ऐसा कमाल कर दिखाया कि कृषि विशेषज्ञ भी दंग रह गए। इन्ही के बल पर जेल को बीते कई सालों से सब्जियों की खेती के लिए पुरस्कार मिल रहा है। जी हां,जिला जेल में रोजाना सुबह करीब डेढ़ क्विंटल सब्जियां ताेड़ीं जा रही हैं। वह भी वर्मी कंपोस्ट खाद के बल पर। जिला जेल के पास बड़ा कृषि क्षेत्र है। वर्तमान में करीब 65 बीघा में खेती हो रही है। इस खेती का जिम्मा प्रमुख रूप से 60 बंदियों के जिम्मे हैं जिसमें 22 बंदी सजायाफ्ता है।
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जुताई-बोआई के समय अन्य बंदियों की मदद भी ली जाती है। बीते 17 से 19 फरवरी को राजभवन में आयोजित प्रदेश स्तरीय फल, शाकभाजी एवं पुष्प प्रदर्शनी में सेम, सलाद आलू व मिश्रित शाकभाजी में जिला जेल को दो प्रथम व दो तृतीय पुरस्कार मिले। यहां जुटे कृषि विशेषज्ञों ने भी कैदियों की मेहनत का लोहा माना। बीते पांच छह सालों में इसे लेकर जिला जेल को एक दर्जन से अधिक बार सम्मानित किया जा चुका है। जेल अधीक्षक कुंदन कुमार मिश्रा बताते है कि हम आर्गेनिक खेती का प्रयास कर रहे हैं। जल्द ही वर्मी कंपोस्ट पर बड़ा काम होगा।



इन चीजों की खेती, मशीनों का प्रयोग
18 एकड़ में पालक, सोया मेंथी, मूली, शलजम आलू, गोभी, पत्ता गोभी, गांठ गोभी, चुकंदर, हरी व लाल सलाद के पत्तों, गेंहू, स्ट्रबेरी, सेम, मटर, बैंगन, शिमला मिर्च आदि की खेती हो रही है। एक किसान की तरह से बंदियों को सुबह खेतों में भेज दिया जाता है। जेल के पास ट्रैक्टर-ट्रॉली, आलू बोने व खोदने की मशीन, थ्रेशर समेत तमाम उपकरण भी है।
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दो जेलों व नारी निकेतन को देते हैं सब्जियां
बाराबंकी जेल में सब्जियों का प्रचुर मात्रा में उत्पादन होने से यहां के बंदियों को तो रोजाना हरी सब्जियां खाने को मिलती है। जेलर आलोक शुक्ला बताते है कि वर्तमान में लखनऊ के मॉडल जेल, जिला जेल व नारी निकेतन को सब्जियां भेजी जा रही है।
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