सिनजेंटा कंपनी द्वारा किसानों को नकली बीज सप्लाई किए जाने के मामले में जिला कृषि अधिकारी से लेकर उप कृषि निदेशक तक जांच करने के बजाए दागी कंपनी को क्लीन चिट देने में लगे हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि किसान ने टमाटर की नर्सरी जनवरी-फरवरी माह में करने के बजाए मार्च में किया जिससे तापमान ज्यादा होनेे के कारण पौधे में फ्रूटिंग कम हुई जिससे किसानों को काफी नुकसान हुआ है।
टमाटर की खेेती करने वाले किसानों ने इस बार सिजेंटा कंपनी से टमाटर का बीज 11 सौ रुपये से लेकर 14 सौ रुपये प्रति दस ग्राम खरीदा था। जिन पेस्टीसाइड की दुकानों ने किसानों ने बीज खरीदा दुकानदार ने किसी किसान को कैश मेमो तक नहीं दिया।
टमाटर की खेती से बर्बाद हुए किसानों में ग्राम रहीमाबाद के घनश्याम, मुनेश्वर, अमरसिंह, दिनेश वर्मा, दयाराम, दिनेश अरविंद शहाबुद्दीन समेत आधा दर्जन गांवों के करीब चार दर्जन किसानों की करीब चार सौ हेक्टेअर की फसल बर्बाद हुई है जिसकी शिकायत किसानों ने भाकियू नेता के साथ जिला कृषि अधिकारी से मामले की शिकायत की थी, लेकिन कृषि विभाग के आलाधिकारी कंपनी द्वारा नकली बीज सप्लाई करने की जांच को छोड़ किसानों को गलत समय से नर्सरी डालने की बात थोप कर कंपनी को क्लीन चिट देने में लगे हुए हैं।
शिकायत पर अधिकारी ने दस में जांच कराकर पेस्टीसाइड की दुकानों व सिजेंटा कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करने का आश्वासन किसानों को दिया था। बीस दिन बीतने के बाद आज तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। जिससे किसानों में काफी आक्रोश है।
जिले में इन कंपनियों ने सप्लाई किया टमाटर बीज
जिले में सिनजेंटा सीड्स, बेजोसीटल, ननहेंस, नामभारी सीड्स, इंडो अमेरिकन, रासी सीड्स, माइक्रो सीड्स, धान्या सीड्स व हैरिटेगसीड्स समेत दर्जनों कंपनियों ने करोड़ों का बीज सप्लाई किया है। जिसमें से अन्य कंपनियों का बीज तो सही रहा लेकिन सिनजेंटा कंपनी का नकली बीज किसानों को इस कदर बर्बाद किया की किसान की लागत के साथ पूरी मेहनत भी चली गई। जिसकी किसानों ने शिकायत की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।
डीओ ने कंपनी का बीज समिति के अनुमोदन की नहीं की जांच
हाईब्रिड बीज बेचने के लिए कंपनी को सबसे पहले भारत सरकार की तकनीकि सलाह समिति से अनुुुमोदन कराने के बाद वह भारत के किसी भी प्रांत में अपना बीज बेच सकती हैं। वहीं प्रदेश में बीज बेचने के लिए तकनीकि सलाह समिति बीज उत्तर-प्रदेश से अनुमोदन मिलने के बाद ही जिलों में अपना बीज बेचने के लिए अधिकृत होती है। कंपनी ने यह सब औपचारिकता पूरी की या फिर ऐसे की बीज बेच दिया इसकी कोई पुष्टि जिला कृषि अधिकारी ने नहीं की। यदि समय से इसकी जांच हो जाती तो किसानों को बर्बादी से बचाया जा सकता था।
पैकेट पर नहीं अंकित होती सूचना
बीज को पैकिंग करते समय पैकेट पर किसानों की जानकारी के लिए आधी अधूरी सूचना ही अंकित की जाती है। इसके पीछे खराब बीज, नकली बीज, आसानी से बेचने की मंशा साफ है। सीड एक्ट के तहत पैकिंग पर बीज की शुद्धता, पैैकिंग तिथि, एक्सपायरी डेट, जर्मिनेशन परशेंटेज, बीज की श्रेणी, मौसम व तापमान, वर्षा का उल्लेख के साथ अन्य बातें जो किसानों को सही निर्देश मिले।
होलसेल्स व रीटेलर की नहीं की गई जांच
कंपनियां अपना बीज होल सेर्ल्स के माध्यम से रीटेलर को बेचती हैं। उसके बाद रीटेलर पेस्टीसाइड पर इसकी सप्लाई करता है। इन सभी को प्राधिकृत पपत्र जिला कृषि अधिकारी जारी करता है। तो यह उसकी जिम्मेदारी बनती है कि कौन कंपनी किस रीटेलर के माध्यम से अपना बीज दुकानों पर सप्लाई करती है। लेकिन अधिकारी की लापरवाही व मिली भगत के कारण कंपनियां अपना गोरखधंधा आसानी से करती है। जिसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
उप कृषि निदेशक डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि सिंजेटा कंपनी के कर्मचारी किसानों के खेतों में जाकर टमाटर की फसल का परीक्षण किया था। जिसमें यही निस्कर्ष निकला की किसानों ने निर्धारित समय के बाद नर्सरी की जिससे प्लांटिंग करने मे भी काफी देर हो गई। जिससे पौधे का बिकास तो हुआ लेकिन फ्रूडिंग नहीं हो सकी। किसानों की लापरवाही के बाद उनकों मुआवजा दे पाना संभव नहीं है। अगर कंपनी चाहे तो किसानों की लागत तो दे ही सकती है।
जिला कृषि अधिकारी राम कुमार यादव ने बताया कि किसानों की शिकायत पर टमाटर के नकली बीज के बारे में जांच की जा रही है। इस संबंध में मै अभी कुछ नहीं कह सकता हूूं। किसानों ने पौध रोपण समय से नही किया जिससे फसल में उत्पादन नहीं हो सका है।