गर्भवती महिलाओं व तीमारदारों से बात करते डीएम शशांक त्रिपाठी। -संवाद
बाराबंकी। डीएम शशांक त्रिपाठी बृहस्पतिवार रात करीब 10:15 बजे अचानक जिला महिला अस्पताल पहुंचे। उन्होंने पड़ताल शुरू की तो पता चला कि गर्भवती महिलाएं सुबह नौ और 11:00 बजे से बैठी हैं मगर उन्हें बेड नहीं मिला। डीएम ने एक वार्ड में छत से गंदगी टपकती देख हैरत जाहिर की। इसके बाद परिसर में टार्च जलाकर कूड़े के ढेर देखकर नाराजगी जताई।
दरअसल, जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी बृहस्पतिवार रात में तहसीलदार के साथ शहर में कंबल बांटने के लिए निकले थे। रैनबसरों का निरीक्षण करते हुए उन्होंने अचानक जिला महिला अस्पताल जाने के लिए कहा। अस्पताल पहुंचे तो उन्हें परिसर में कूड़े के ढेर लगे मिले।
इसके बाद लिफ्ट से ऊपर पहुंच गए जहां पर गर्भवती महिलाओं को भर्ती किया जाता है। वहां पर महिलाओं की भीड़ देखकर रुक गए और उन्होंने पूछताछ शुरू कर दी। नेहा नाम की एक गर्भवती महिला ने बताया कि वह सुबह 9:00 बजे से बैठी है मगर बेड नहीं मिला। एक अन्य गर्भवती ने भी बताया कि सुबह 11:00 से बैठी है। तब तक सीएमएस आ गए।
जिलाधिकारी लेबर रूम की तरफ पहुंचे और उन्होंने प्रसव की संख्या व सिजेरियन व नॉर्मल की जानकारी ली। इस दौरान पता लगा कि एक ही बेड पर दो महिलाओं को लिटाया जा रहा है। गर्भवती महिलाओं के एक विशेष कक्ष में छत से गंदगी टपक रही थी। इस पर उन्होंने सीएमएस से नाराजगी जाहिर की तो सीएमएस ने संबंधित कर्मचारियों को फटकार लगाई।
डीएम ने अंदर जाकर गर्भवती महिलाओं के पास मिले उपकरणों को खराब अवस्था में देखकर कंपनी का नाम भी पूछा। डीएम ने मुख्य परिसर में ही कूड़े व मलबे के पुराने ढेर को टॉर्च जलाकर दिखाया और कहा कि यहां क्यों पड़ा है। तब तक सीएमओ भी जिला अस्पताल आ चुके थे। डीएम ने सभी अधिकारियों को बुलाकर अस्पताल की हालात को सुधरवाने के लिए कहा।