बाराबंकी। न्यायालय के निर्देशों के बाद भी मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन नदी, सरोवर और तालाब आदि के घाटों पर किया गया। हैदरगढ़ कस्बे को छोड़ दें तो जिले में किसी भी स्थान पर प्रतिमाओं का भू-विसर्जन नहीं किया गया।
प्रशासन ने भी न्यायालय के आदेशों का पालन कराने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। लोगों ने भले ही पूरी श्रद्धा के साथ नौ दिन मां दुर्गा की पूजा-अर्चना कर मां की प्रतिमाओं को नदी, सरोवर व झील आदि मेें प्रवाहित करने में आस्था दिखाई हो लेकिन इसके चलते होने वाले जल प्रदूषण के प्रति कहीं भी आस्था नहीं दिखी।
इस बार शारदीय नवरात्रि को लेकर जिले भर के 830 पूजा पंडालों में 1530 देवी प्रतिमाएं स्थापित की गई थीं। जल प्रदूषण को दूर करने के लिए न्यायालय के आदेश पर शासन ने इन प्रतिमाओं को भू-विजर्सन करने के निर्देश पूर्व में दिए थे लेकिन जिले में इसका अनुपालन होता नहीं दिखा।
प्रदूषण के सापेक्ष लोगों में भक्ति और उत्साह की आस्था ज्यादा दिखी। इसका परिणाम यह रहा कि हैदरगढ़ क्षेत्र को छोड़ दें तो जिले में किसी भी चिह्नित विसर्जन स्थल पर देवी प्रतिमाओं का भू-विसर्जन नहीं किया गया।
भले ही घाघरा, कल्याणी और सुमली नदी के बहते पानी में प्रतिमाओं को विसर्जित किया गया हो लेकिन लोग इस बात से एकदम अंजान रहे कि इससे होने वाले प्रदूषण के चलते नदियों पर क्या असर पड़ेगा।
फतेहपुर के शीतला प्रसाद श्रीवास्तव का कहना है कि हम सभी आज भी जल प्रदूषण को लेकर गंभीर नहीं हैं। प्रतिमाओं को घाघरा, तालाब, झील आदि में विसर्जित करने से काफी प्रदूषण होता है। लोग इसे समझ नहीं रहे हैं। यह बहुत ही गंभीर विषय है। इस पर सभी को मंथन करना चाहिए। प्रतिमाओं का भू-विसर्जन करना ही सही है।
सिरौलीगौसपुर के ग्राम खजुरी निवासी मनोज नाग का कहना है कि जिस प्रकार शासन ने नदी व सरोवर में प्रतिमाओं को विसर्जित करने पर रोक लगाई थी, उस पर काम न होकर घाघरा व कल्याणी नदी में ही प्रतिमाएं विसर्जित की गईं। इससे नदी का जल प्रदूषित होता है और नदी के किनारे बसे लोगों को कुछ दिन बाद अजीब सी गंध मिलती है। लोगों को जागरूक होने की जरूरत है।