बलरामपुर। विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) राहुल सिंह द्वितीय की अदालत ने वर्ष 2018 के एक मामले में तीन दोषियों को कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है। दुष्कर्म के दोषी हलीम को 10 वर्ष का कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड, शहजाद को पांच वर्ष का कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड तथा शीबू को तीन वर्ष छह माह के कारावास की सजा सुनाई गई। अदालत ने विवेचना में खामियां मिलने पर संबंधित विवेचक के खिलाफ कार्रवाई के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को निर्णय की प्रति भेजने का आदेश दिया है।
अभियोजन अधिकारी के अनुसार, 15 मई 2018 को कोतवाली नगर क्षेत्र के एक व्यक्ति ने अपनी नाबालिग बेटी के अपहरण की तहरीर दी थी। आरोप था कि रात करीब 10 बजे उसकी बेटी अपनी बहन के साथ खेत में गई थी, जहां से अहमद रजा ने शहजाद के सहयोग से उसे अगवा कर लिया। मामले में रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना की गई। सुनवाई के दौरान साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने तीनों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।
अदालत ने विवेचना में गंभीर खामियां मिलने पर संबंधित विवेचक की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। प्राथमिकी और पीड़िता के चिकित्सकीय परीक्षण के दौरान दिए गए बयान में अहमद रजा का नाम सामने आया था, लेकिन विवेचक ने केस डायरी में उसका पता नहीं चलने का उल्लेख किया। इसके बाद हलीम को मुख्य अभियुक्त बनाया गया। अदालत ने पहचान परेड नहीं कराने और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) को विधि के अनुसार प्रमाणित नहीं कराने पर भी आपत्ति जताई। न्यायालय ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को पीड़िता की स्थिति और घटना के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए नियमानुसार अधिकतम प्रतिकर दिलाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का आदेश दिया।