खत्म हो रहा तालाबों का अस्तित्व
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तालाबों से अवैध कब्जे हटवाने में जिला प्रशासन नाकाम साबित हो रहा है। स्थिति यह है कि शहर के कई तालाबों का अस्तित्व समाप्त हो गया है। तालाबों को पाटकर प्लाटिंग तक कर दी गई। ग्रामीण क्षेत्र की स्थिति और भी खराब हैं। प्रशासन की ढिलाई के चलते धीरे-धीरे तालाबों का अस्तित्व समाप्त हो रहा है।
जिले में करीब 22 सौ तालाब रिकार्ड में दर्ज हैं। इनमें कितने तालाबों अपने असल रूप में मौजूद हैं, इसकी कोई जानकारी जिला प्रशासन के पास नहीं है। असलियत यह है कि शहर से लेकर गांव तक तालाबों को पाटकर उनकी जमीनों पर कब्जे किए जा रहे हैं।
शहरी क्षेत्र व कस्बों के तालाबों को पाटकर प्लाटिंग का धंधा जोरों पर है। ऐसी शिकायतें हर तहसील दिवस में आती हैं लेकिन उनसे अवैध कब्जे हटवाने के निर्देश तक ही प्रशासन की कार्रवाई सीमित रह जाती है।
शासन के आदेश पर जिले के पुराने तालाबों का जीर्णोद्वार कराने और करीब तीन सौ नए तालाब खोदवाने का फरमान एसडीएम को जारी किया गया। इसके तहत 15 मई और 30 मई को दो चरणों में पूरे जिले में अभियान भी चलाया जाएगा।