जनपद में डॉक्टरों व चिकित्सा स्टॉफ की कमी के चलते अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं। जिससे जिला अस्पताल व सीएचसी केंद्रों पर आने वाले मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं का उचित लाभ नहीं मिला पा रहा है।
जिला महिला अस्पताल में तो करीब पचास फीसदी ही डॉक्टर कार्यरत हैं। ऐसे में यहां आने वाली प्रसूताओं व अन्य मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जनपद में 214 के सापेक्ष 193 डॉक्टर ही कार्यरत हैं। जबकि, स्टॉफ नर्स में 68 फीसदी पद रिक्त हैं। जाटा बरौली, सतरिख, बड़ागांव, घुुंघटेर, सिरौलीगौसपुर मथुरानगर में तो एक भी स्टॉफ नर्स नहीं है।
स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टरों व चिकित्सा स्टॉफ की भारी कमी है। जबकि, सालों पहले सृजित पदों के सापेक्ष अब मरीजों की संख्या में कई गुना इजाफा हो गया है जिसके चलते स्टॉफ की और भी कमी डॉक्टर व कर्मचारी महसूस कर रहे हैं। बढ़ रही मरीजों की संख्या और डॉक्टरों की कमी के चलते जनपद की स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं।
जिला अस्पताल पुरुष में चिकित्सकों की संख्या पूरी 27 है, लेकिन यह मानक काफी पहले के हैं। जबकि, अब जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या काफी बढ़ गई है। यदि दशा जिला महिला अस्पताल की है। यहां मरीजों का दबाव तो बढ़ा ही है स्टॉफ में भारी कटौती गई है।
जिला अस्पताल महिला में डॉक्टरों के 14 पद है जबकि कार्यरत आठ ही चिकित्सक हैं। जिसके चलते यहां आने वाले मरीजों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। यही दशा जनपद के सभी सीएचसी सेंटरों पर है।
सरकारी नौकरी नहीं चाहते एमबीबीएस डॉक्टर
एक निजी अस्पताल के प्रबंधक/डॉक्टर वीरेंद्र पटेल कहते हैं कि स्वयं का अस्पताल चलाना सरकारी नौकरी से अधिक बेहतर है। सरकारी अस्पतालों में काफी अच्छे डॉक्टर हैं, लेकिन सिस्टम की गड़बड़ी उनके बेहतर काम में बाधक है।
वह कहते हैं कि काम के एवज ने वेतन भी काफी कम है। साथ ही उन्हें लोकल व विभाग की राजनीति को भी झेलना पड़ता है। ऐसे में अपना अस्पताल ही बेहतर है।
डॉक्टर रोहित अग्रवाल भी सरकारी के सापेक्ष अपने काम को अधिक महत्व देते हैं। वह कहते हैं कि चिकित्सकों का पेशा जिम्मेदारी का होता है। वह किसी भी दशा में अपने मरीज को नहीं छोड़ सकता है। भले ही उनके घर कितना भी आवश्यक कार्य क्यों नहीं हो। साथ ही डॉक्टर की जिम्मेदारी के सापेक्ष सरकारी नौकरी में मान सम्मान भी नहीं मिल रहा है।
सीएमओ डॉ. रविंद्र कुमार ने बताया कि चिकित्सक और स्टॉफ की सीएचसी पीएचसी पर कमी की बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। इस समस्या से विभागीय उच्चाधिकारियों को अवगत भी करा दिया गया है। इसके बाद भी जो स्टाफ है उसे निर्देश दिए गए हैं कि जो मरीज अस्पताल में आए उसका बेहतर उपचार किया जाए। इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।