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Barabanki News: एफआरयू में बेंच पर लिटाकर होता मरीजों का इलाज

Sat, 27 May 2023 01:03 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
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हैदरगढ़ (बाराबंकी)। सीएचसी के एफआरयू बनने के 15 साल बाद भी मरीजों को अव्यवस्थाओं से जूझना पड़ रहा है। यहां मरीजों को बेंच पर लिटाकर इलाज किया जा रहा है। यहां आने वाले मरीज गंदगी, दुर्गंध, अंधेरे से तो जूझते ही हैं, जांच और दवाओं पर सैकड़ों रुपये भी खर्च करने को मजबूर हैं। लेकिन सबसे बड़ी बात ये हैै कि यहां की ओपीडी में चिकित्सक मिलते ही नहीं हैं, जिससे मरीज निराश होकर लौट रहे हैं या फिर निजी चिकित्सकों के पास जाने को मजबूर हैं।
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सीएचसी हैदरगढ़ को प्रथम संदर्भन इकाई (एफआरयू) का दर्जा देकर मरीजों के लिए सुविधाओं को बढ़ाने का सपना दिखाया गया था। लेकिन 15 साल बीतने के बाद भी केंद्र पर मरीजों को निशुल्क दवा व इलाज नहीं मिल पा रहा है। हर ओर गंदगी, शौचालयों से निकली दुर्गंध के कारण रुकना मुश्किल है। वार्डों में अंधेरा व गर्मी में भर्ती मरीजों को लॉबी में कंक्रीट की बेंच पर पर लिटाकर इलाज किया जाता है।


शुक्रवार दिन में करीब साढ़े 11 बजे संजू पेट दर्द की समस्या पर इलाज के लिए पहुंचीं। डॉक्टर ने खून व अन्य जांच बाहर से कराने के लिए पर्ची लिखी। परिसर के पास मौजूद निजी क्लीनिक पर 700 रुपये का खर्च बताया गया। 500 की दवा भी बाहर से लिखी गई। इनके पास मात्र सौ रुपये होने से बिना इलाज से लौट गईं। किर्सिया के ठाकुरदीन को गले में गिल्टी होनेे पर 150 रुपये की दवा बाहर से खरीदनी पड़ी, भटगवां की मोनी मिश्रा को पेट में दर्द की समस्या पर लाॅबी में कंक्रीट बेंच पर लिटा कर ड्रिप चढ़ाई जा रही थी।
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विष्णु गिरी को पेट दर्द में गैलरी में ड्रिप चढ़ाई गई। केंद्र पर आकस्मिक सेवा व ओपीडी के लिए मात्र एक चिकित्सक मौजूद रहा। डेंटल सहित डॉक्टरों के अन्य कक्ष खाली रहे। केंद्र पर करीब पांच स्थायी व अस्थाई मिलाकर दस से अधिक डॉक्टरों की लंबी फौज होने के बाद भी ओपीडी में कुर्सियां खाली पड़ी रहती हैं। अधीक्षक डॉ. मुकुंद पटेल ने बताया कि जांच हो रही है। बाहर से जांच व दवा लिखने के बारे में कोई जानकारी नहीं है। यदि ऐसा है तो जांच कराएंगे।
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