बाराबंकी। जिला अस्पताल व जिला महिला अस्पताल में सक्रिय शातिरों की फौज मरीजों की दलाली में जुटी है। जैसे ही कोई मरीज रेफर होता है या गंभीर हालत में पहुंचता है, वैसे ही निजी अस्पतालों के दलाल उसे तत्काल घेर लेते हैं। बेदम मरीज के बेहाल परिजनों को अच्छे इलाज का सपना दिखाकर निजी अस्पताल ले जाते हैं और फिर इलाज के नाम पर जमकर शोषण होता है। तीन दिन पहले रेफर हुए घायल युवक की जान इसीलिए चली गई, क्योंकि निजी अस्पताल के कर्मी उसे अपने यहां ले जाने के लिए बीच सड़क पर काफी देर तक मारपीट करते रहे।
जिला अस्पताल व जिला महिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना दो हजार मरीज पहुंचते हैं। जिला अस्पताल के ट्राॅमा सेंटर (इमरजेंसी) में रोजाना 60 से 65 मरीज भर्ती किए जाते हैं। दोनों अस्पतालों में मिलाकर करीब 20 मरीज रोज रेफर होते हैं। यह रेफर मरीज ही निजी अस्पतालों के दलालों का शिकार होते है।
ये दलाल अस्पताल के अंदर तक मौजूद रहते हैं। अस्पताल के बाहर इनकी एंबुलेंस खड़ी रहती हैं। कभी-कभी तो हालत यह हो जाती है कि निजी अस्पतालों के दलाल मरीज को ले जाने के चक्कर में आपस में ही भिड़ जाते हैं। शहर के आधा दर्जन से अधिक निजी अस्पताल तो रेफर मरीजों के दम पर ही चल रहे हैं। कुछ दलाल तो ऐसे हैं, जिन्हें आम जनता भी पहचानती है। इन्हें डॉक्टर से लेकर वार्ड ब्वाय तक जानते हैं। निजी अस्पताल के ये दलाल रात में तीमारदारों को आसानी से शिकार बना लेते हैं। क्योंकि, लखनऊ तक की दौड़ लगाने की सोच तीमारदार दलालों के झांसे में आ जाते हैं।
सीएमओ डॉ. अवधेश यादव ने कहा कि निजी अस्पताल के कर्मियों तथा निजी एंबुलेंस का सरकारी अस्पताल में प्रवेश पर पूरी तरह से प्रतिबंध है। इसके बावजूद यदि कोई इस तरह की हरकत करता है तो इसकी जांच कराई जाएगी और ऐसे लोगों को चिह्नित कराकर इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इन बीमारियों के मरीज होते है शिकार
घायल होने या किसी बीमारी से गंभीर होने के बाद मरीज को परिजन जिला अस्पताल लेकर ही पहुंचते हैं, मगर जिला अस्पताल में कई बीमारियों का इलाज ही नहीं होता। न्यूरो, गैस्ट्रोलॉजी, हिस्टोपैथालॉजी, पीडियाट्रिक सर्जरी, हृदय रोग के मरीजों को तत्काल रेफर किया जाता है। सड़क हादसे में गंभीर घायलों को भी तत्काल रेफर कर दिया जाता है। जिला अस्पताल में इनके इलाज की व्यवस्था नहीं है, मगर दलाल अपने यहां सभी का इलाज होने का दावा करते हैं।