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दलों से ज्यादा निर्दलीयों पर मतदाताओं ने जताया भरोसा

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बाराबंकी। जिला पंचायत सदस्य के घोषित नतीजों में किसी भी दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिला। जनादेश में मतदाताओं ने अपनी मंशा को साफ कर दिया है और दलों से कहीं अधिक भरोसा निर्दलीय उम्मीदवारों पर जताया है। यहीं वजह रही कि सबसे ज्यादा निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव जीतकर जिला पंचायत पहुंचने में सफल रहे हैं। किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत न मिलने से अध्यक्षी की कुर्सी हथियाने के लिए जोड़तोड़ की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है।
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जिला पंचायत सदस्य की 57 सीटों के लिए हुए चुनाव में सपा, भाजपा, बसपा और कांग्रेस ने अपने-अपने उम्मीदवार उतारे थे। भाकियू समर्थित उम्मीदवारों के अलावा निर्दलीय भी चुुनाव मैदान में थे। सोमवार को घोषित चुनाव नतीजों ने दलों की उम्मीदों पर पूरी तरह से पानी फेर दिया है कुछ सीटों को छोड़ दिया जाए तो ज्यादातर सीटों पर पार्टी समर्थित उम्मीदवार चुनाव हार गए हैं।
मतदाताओं ने इन सीटों पर निर्दलीय के रुप में चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों पर ज्यादा भरोसा जताया है। यहीं कारण रहा है कि पार्टी समर्थित उम्मीदवारों की जगह चुनाव जीतने वालों ने निर्दलीयों की संख्या काफी ज्यादा रही। गांव की जनता ने दलों की अपेक्षा किसान नेताओं पर भी काफी भरोसा जताया है और भाकियू समर्थित दो उम्मीदवार भी चुनाव जीतने में सफल रहे हैं।
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ये विजेता अध्यक्षी की दौड़ में हुए शामिल
सिद्धौर चतुर्थ से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीते पूर्व सांसद रामसागर रावत जिला पंचायत अध्यक्ष की दौड़ में शामिल हो गए हैं। वहीं भाजपा से पूर्व विधायक राजरानी रावत निंदूरा क्षेत्र से तथा भाजपा के कद्दावर नेता रहे कपिल देव कुशमेश की बहू हैदरगढ़ क्षेत्र से चुनाव जीतने में सफल रही हैं। ये भी अध्यक्ष पद के लिए अपना दावा ठोंक सकती हैं। इसके अलावा भाजपा से बागी होकर निर्दलीय उम्मीदवार के रुप में त्रिवेेदीगंज क्षेत्र से चुनाव लड़ीं और जीत हासिल करने वाली नेहा आनंद भी अध्यक्ष पद के लिए दावेदार हो सकती हैं।
दिग्गजों को मतदाताओं ने नकारा
पूर्व विधायक रामगोपाल रावत के पुत्र इंजीनियर कृष्ण कुमार मसौली क्षेत्र से चुनाव हार गए हैं। वहीं भाजपा से अध्यक्ष पद की प्रबल दावेदार ऊषा गौतम को देवा प्रथम से मतदाताओं ने नकार दिया है। इसके अलावा भाजपा सांसद उपेन्द्र सिंह रावत के पीआरओ दिनेश की पत्नी भी त्रिवेदीगंज क्षेत्र चुनाव हार गई हैं। इसके अलावा हरख क्षेत्र के चुनाव लड़ीं भाजपा नेता उमेश मिश्रा की पत्नी अलका मिश्रा व इसी क्षेत्र से प्रतापगढ़ से चुनाव लड़ने आए स्वराज सौरभ भी चुनाव हार गए हैं मतदाताओं ने इन्हें पूरी तरह से नकार दिया है।
भाकियू के उम्मीदवारों ने दर्ज की जीत
भाकियू नेता रामबरन वर्मा और हौसिला प्रसाद सिद्धौर क्षेत्र से चुनाव जीतने में सफल रहे हैं। मतदाताओं ने दलों के घोषित प्रत्याशियों पर भरोसा जताने के बजाए किसान नेताओं पर ज्यादा विश्वास जताया है। अब ये मतदाताओं की उम्मीदों पर कितना खरा उतरते हैं ये आने वाला वक्त ही बताएगा।
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