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आपत्तियों का निस्तारण में पलट रहे आरक्षण नीति के पन्ने

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बाराबंकी। आरक्षण सूची जारी होने के बाद सबसे अधिक प्रधान पद पर 427 आपत्तियां आईं थीं। जिनके निस्तारण की प्रक्रिया बुधवार से शुरू हुई है। सीडीओ के समक्ष डीपीआरओ और अपर मुख्य अधिकारी एक-एक आपत्ति को गंभीरता से पढ़कर उसके निस्तारण के लिए आरक्षण नीति के पन्ने पलटते रहे। शुक्रवार तक आपत्तियों का निस्तारण किया जाना है।
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जिले के 1161 ग्राम पंचायतों में आरक्षण नीति के आधार पर जिला प्रशासन द्वारा सीटों का आरक्षण जारी किया गया था। इसमें एससी महिला, एससी, ओबीसी महिला, ओबीसी, महिला और अनारक्षित वर्ग शामिल थे। आरक्षण सूची जारी होने के चार दिनों के अंदर प्रधान पद के लिए सबसे अधिक 427 आपत्तियां ब्लॉक से लेकर डीपीआरओ कार्यालय में आईं थीं।
इनके निस्तारण की कार्रवाई बुधवार से शुरू हुई। कलेक्ट्रेट स्थित सीडीओ एकता सिंह के कक्ष में पूरे दिन डीपीआरओ रणविजय सिंह और एएमए ने आरक्षण नीति के आधार पर आपत्तियों के निस्तारण की कार्रवाई शुरू की। कमेटी के पदाधिकारी आरक्षण नीति को पढ़कर उस पर मंथन करते रहे।
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इन सभी आपत्तियों का निस्तारण शुक्रवार तक करना है। इसके बाद 13 और 14 मार्च को आरक्षण सूची का अंतिम प्रकाशन किया जाएगा। इस संबंध में डीपीआरओ रणविजय सिंह ने बताया कि आपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। नियमानुसार ही इसमें बदलाव संभव है।
गांव में ही मतदान केंद्र बनाने की मांग
रामसनेहीघाट। बनीकोडर विकासखंड के खेवराजपुर मजरे असेना गांव के लोगों का कहना है कि उनके यहां तीन किलोमीटर दूर मतदान केंद्र बना दिया गया है। ग्रामीणों ने जिला निर्वाचन अधिकारी को एक पत्र भेजकर गांव में ही मतदान केंद्र बनाने की मांग की है।
ग्रामीणों ने निर्वाचन अधिकारी को पत्र भेजते हुए कहा है कि लोकसभा व विधानसभा चुनाव में मतदान के लिए गांव में बने प्राथमिक विद्यालय में मतदान केंद्र बनाया जाता है। लेकिन पंचायत चुनाव में गांव से तीन किलोमीटर दूर आशयना प्राथमिक विद्यालय में मतदान केंद्र बनाने से तमाम मतदाता वहां जा नहीं पाते हैं। जिससे मतदान प्रतिशत काफी कम हो जाता है। लोगों ने मतदान केंद्र बदलने की मांग की है।
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