बाराबंकी। लगातार तीन दिन हुई बारिश और तेज हवा से धान की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है। अगेती धान की फसल विशेष रूप से प्रभावित हुई है। खेतों में कटी पड़ी फसल पानी में डूब गई। मंगलवार को धूप निकलने पर किसान खेतों से पानी निकालकर फसल बचाने में जुट गए। कृषि वैज्ञानिक डॉ. रूपन रघुवंशी ने किसानों को खेतों से पानी निकालकर फसल सुरक्षित करने की सलाह दी।
पंपिंग सेट से पानी निकालने में जुटे किसान
कोटवाधाम प्रतिनिधि के अनुसार सिरौलीगौसपुर तहसील क्षेत्र में धान को सर्वाधिक नुकसान हुआ है। कमोली गांव में किसान रामप्रकाश और दयाराम पंपिंग सेट लगाकर खेतों से पानी निकाल रहे हैं। कई किसानों के पास पानी निकालने का साधन नहीं है, जिससे धान खेतों में ही पड़ा है। केला की फसल को भी भारी क्षति हुई है। एसडीएम अनिल कुमार सरोज ने फसल नुकसान का आकलन कराने के निर्देश दिए हैं। किसानवार नुकसान के प्रतिशत के आधार पर डाटा तैयार किया जाएगा।
नाव से खेत में पहुंचकर काट रहे धान
बेलहरा। रंजीतपुर निवासी किसान रमेश ने टिन की नाव बनाई है। मंगलवार को वह इसी नाव से खेत में धान काटते दिखे। उन्होंने बताया कि जल्द फसल नहीं निकाली गई तो वह पूरी तरह खराब हो सकती है। लंबे समय तक पानी में रहने से फसल सड़ने और दाना खराब होने का डर है। रामविजय मिश्र की करीब 60 बीघा, संतोष की 45, पुतानचंद्र की 60, जगतनारायण की 50, कुंवारे की 35 और गुरबचन की करीब 20 बीघा धान की फसल जलमग्न है। एसडीएम कार्तिकेय सिंह ने बताया कि राजस्व टीम भेजकर सर्वे शुरू करा दिया गया है।
फसल नुकसान पर किसानों ने मांगा मुआवजा
फतेहपुर। तहसील क्षेत्र में बारिश और तेज हवा से धान की फसल को भारी नुकसान हुआ है। कई जगह फसल गिर गई। मंगलवार को भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं ने एसडीएम कार्तिकेय सिंह को ज्ञापन देकर मुआवजे की मांग की। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों का तत्काल राजस्व विभाग की टीम से सर्वे कराने की मांग की। इस मौके पर तहसील अध्यक्ष दद्दन सिंह, अजीत विश्वकर्मा, सुमित वर्मा और हंसराज वर्मा मौजूद रहे।
कोटवाधाम में पंपिंग सेट लगा खेतों से पानी निकालते किसान।
कोटवाधाम में पंपिंग सेट लगा खेतों से पानी निकालते किसान।
कोटवाधाम में पंपिंग सेट लगा खेतों से पानी निकालते किसान।