बाराबंकी। डेंगू के डंक का खतरा लगातार बढ़ने के बावजूद सरकारी अस्पतालों में इससे पीड़ित मरीजों को इलाज की पर्याप्त सुविधा नहीं मिल रही है। सरकारी अस्पतालों में जांच और प्लेटलेट्स की सुविधा न मिल पाने के कारण मरीजों को विवश होकर निजी अस्पतालों में महंगा इलाज कराने की परेशानी उठानी पड़ रही है। डेंगू मरीजों के इलाज में हो रही इस परेशानी को जानने समझने के बाद भी इससे छुटकारा दिलाने को लेकर जिम्मेदार उदासीन बने हैं।
डेंगू की चपेट में आकर जिले के रामनगर तहसील के बिछलखा निवासी प्रज्ञा पांडेय की तीन दिन पहले मौत हो चुकी है। इसके अलावा मुकेश शुक्ला, गौरव, अभिषेेक कुमार निवासी रामनगर, मानवेन्द्र निवासी फैजुल्लागंज समेत कई अन्य डेंगू पीड़ित मरीजों का इलाज निजी अस्पतालों में चल रहा है।
सरकारी अस्पतालों में डेंगू के इलाज और जांच की कोई सुविधा मरीजों को नहीं मिल पा रही है। सीएचसी की बात दूर जिला अस्पताल के ब्लड बैंक तक में डेंगू मरीजों के लिए जरूरी प्लेटलेट्स तक उपलब्ध नहीं हैं। जिला अस्पताल में तो डेंगू मरीजों के लिए आरक्षित वार्ड में हड्डी रोग विभाग के मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। ऐसे में किसी डेंगू पीड़ित मरीज के आ जाने पर उसका इलाज करने की बजाए अस्पताल के डॉक्टर तत्काल उसके रेफर का पर्चा तीमारदार के हाथ में थमा देते हैं।
नगर पालिका के अधिकारी भी डेंगू प्रभावित इलाकों में इसकी रोकथाम को लेकर फागिंग कराना तो दूर साफ सफाई से लेकर एंटी लार्वा कार्रवाई को लेकर भी पूरी तरह उदासीन बने हैं।
इस संबंध में सीएमओ डॉ. अवधेश कुमार यादव का कहना है कि डेंगू रोग से पीड़ित मरीजों को अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों के आधार पर बेहतर इलाज देने का पूरा प्रयास कराया जा रहा है। सभी सीएचसी अधीक्षकों को भी इस संबंध में आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। डेंगू की एलाइजा जांच को लेकर हिंद और मेयो अस्पतालों से बात की जा रही है। जल्द ही जांच और इलाज की सुविधा और बेहतर बनेगी।