हॉकी खिलाड़ी केडी सिंह बाबू छह भाई थे। कुंवर राजेंद्र सिंह, भूपेंद्र सिंह, सुखदेव सिंह, नरेश सिंह व कुंवर दिग्विजय सिंह उर्फ केडी सिंह बाबू और सबसे छोटे सुरेश सिंह। कुंवर सुरेश सिंह के पुत्र राघवेंद्र सिंह ने बताया कि वर्ष 2006 में सभी भाइयों में इस बात का समझौता हुआ था कि कोठी को बेचकर मिलने वाले रुपये आपस में बांट लिए जाएं, लेकिन एक भाई ने कोठी बेचने से मना कर दिया।
इसी के बाद मामला कोर्ट में पहुंचा और केड़ी सिंह बाबू के भतीजे कुंवर उमेश सिंह की पुत्री दिव्या शाही ने वसीयत के आधार पर पक्षकार 20 वारिसानों को विपक्षी बनाते हुए सिविल कोर्ट में बंटवारे का वाद दायर किया। 21 अप्रैल 2009 में सिविल कोर्ट ने आपसी सहमति के आधार पर कोठी की बिक्री कर धनराशि हिस्से के अनुसार बांटने का आदेश दिया। इसके बाद कोर्ट के आदेश व बिक्री के अनुपालन के लिए वर्ष 2009 में पक्षकार कुंवर आनंद सिंह ने वाद दाखिल किया। 15 साल तक चले इस मामले में 31 जनवरी 2024 को छह माह के अंदर कोठी की बिक्री करने व रिसीवर तैनात करने का आदेश पारित हुआ।
कोठी पर कई की निगाहें, बिक्री प्रकिया का इंतजार
केडी सिंह बाबू की कोठी छह माह के अंदर बिकेगी। इस जानकारी के बाद खरीदारों की निगाहें कोठी पर लग गईं हैं। जिले के ही नहीं, प्रदेश व देश के कई हिस्सों के लोगों को कोठी की चाह है। इंतजार बस बिक्री प्रकिया शुरू होने की है।