बाराबंकी। केंद्र और प्रदेश सरकार प्रत्येक योजनाओं को आखिरी व्यक्ति तक सीधे पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया के एप ट्वीटर, इंस्टाग्राम आदि माध्यमों का प्रयोग कर रही है। गांव तक विकास की परियोजनाओं का गुणवत्तापूर्ण अमल हो, या फिर कर्मचारियों-अधिकारियों की मौके पर मौजूदगी जांचने के लिए व्हाट्सएप जैसे ग्रुप पर हाजिरी भी लगाई जाती है। पर ये चलन अब धीरे-धीरे बंद होता जा रहा है।
जिले के विकास से जुड़े हों या राजस्व से, कई अफसरों के ट्वीटर अकाउंट या तो सक्रिय नहीं हैं या फिर बने ही नहीं हैं। ऐसे में ट्वीटर के माध्यम से अपनी आवाज उठाने वाले फरियादियों की बात उन तक पहुंच नहीं रही है।
सीडीओ बाराबंकी का ट्वीटर अकाउंट पिछले एक माह से निष्क्रिय पड़ा है। 17 फरवरी 2023 के बाद से इस पर न तो कोई ट्वीट हुआ और न रिट्वीट। परियोजना निदेशक, डीडीओ, डीपीआरओ और उपनिदेशक कृषि के पास अपना ट्वीटर अकाउंट ही नहीं है। ये हालात तब हैं जब सरकार प्रत्येक ग्राम पंचायत से ही सारे कार्य ऑनलाइन करने के निर्देश दे रखे हैं। सचिव से लेकर बीडीओ तक के लोगों की समीक्षा सोशल मीडिया पर कैसे करते होंगे इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है।
इसी तरह एडीएम का ट्वीटर अकाउंट 25 फरवरी 2022 के बाद से सक्रिय नहीं रहा। एसडीएम सदर के नाम से ट्वीटर अकाउंट बनाया गया था, लेकिन उनके तबादले के बाद कई एसडीएम बदल गए पर इस पर सक्रियता किसी की नहीं दिख रही है। जबकि सरकार की मंशा है कि सारे अधिकारी अपनी गतिविधियों, विकास कार्यों एवं जन आकांक्षाओं के निस्तारण की स्थिति से अपडेट रहा करें।
सबसे ज्यादा शिकायतों वाले पॉवर कॉर्पोरेशन का ट्वीटर अकाउंट एमवीवीएनएल बाराबंकी के नाम से है, लेकिन 30 जनवरी 2023 से कोई अपडेट नहीं है। जहां एक तरफ सरकार सोशल मीडिया को अपना बड़ा हथियार मानकर आम जन तक अपनी योजनाओं का लाभ शीघ्र पहुंचाना चाहती है, वहीं अधिकारियों की निष्क्रियता उनकी मंशा पर पानी फेर रही है।
सोशल मीडिया पर जिले में डीएम और एसपी के साथ उनका विभाग जरूर अपनी प्रतिदिन की गतिविधियां और आने वाली शिकायतों पर निस्तारण के लिए सक्रिय रहते हैं। डीएम अविनाश कुमार और एसपी दिनेश कुुमार सिंह नियमित गतिविधियां ट्वीटर व सोशल मीडिया के अन्य प्लेटफार्म पर साझा की जाती हैं। डीसीओ, सीएमओ, डीएसओ व बीएसए जैसे तमाम अधिकारी ट्वीट व रीट्वीट कर रहे हैं।