बाराबंकी। चिकित्सा शिक्षा को अधिक व्यवहारिक बनाने के लिए अब शासन ने नई पहल की है। शासन ने निर्देश जारी किया है कि अब शवों का पोस्टमार्टम राजकीय चिकित्सा शिक्षा महाविद्यालयों के साथ ही निजी मेडिकल कॉलेजों में भी होगा। इसके लिए बाराबंकी समेत सभी जिलों के सीएमओ को जरूरी दिशा निर्देश जारी कर दिया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य मेडिकल छात्रों को व्यवहारिक ज्ञान देना और शव परीक्षण की बारीकियों को बेहतर ढंग से समझाना है। इससे स्वास्थ्य विभाग के पोस्टमार्टम हाउस पर दबाव भी कम होगा।
जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समिति गठित होगी, जिसमें सीएमओ, पुलिस अधिकारी, मेडिकल कॉलेज प्रशासन के सदस्य शामिल होंगे। यही समिति स्थायी रूप से थानों का आवंटन तय करेगी, ताकि संबंधित थानों से शव सीधे निर्धारित मेडिकल कॉलेज को भेजे जा सकें। जिले में वर्तमान में दो निजी मेडिकल कॉलेज संचालित हैं।
अभी निजी संस्थानों को केवल लावारिस शव ही उपलब्ध कराए जाएंगे। जघन्य अपराध या मेडिकल बोर्ड द्वारा कराए जाने वाले पोस्टमार्टम निजी कॉलेजों में नहीं होंगे। इसके जरिए मेडिकल छात्रों को फोरेंसिक मेडिसिन का बेहतर व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलेगा। प्रदेश में फोरेंसिक मेडिसिन विभाग वाले चिकित्सा विश्वविद्यालयों और मेडिकल कॉलेजों को इस प्रक्रिया में औपचारिक रूप से शामिल किया गया है। जहां फोरेंसिक मेडिसिन विभाग मौजूद है, वहां पोस्टमार्टम होगा। इसकी रिपोर्टिंग और रिकॉर्डिंग की जिम्मेदारी सीएमओ की ही रहेगी।
24 घंटे में हो जाते है पांच से आठ शव
जिला मुख्यालय पर स्टेशन रोड पर पोस्टमार्टम हाउस है। जिले में सड़क दुर्घटनाएं व फंदे पर लटककर जान देने की घटनाएं ज्यादा होती हैं। कभी-कभी तो यहां 24 घंटे के अंदर पांच से 10 शव तक हो जाते हैं। परिजनों के न आने के कारण भारी दिक्कत झेलनी पड़ती है। जिले में लावारिस शव भी काफी मिलते हैं।