जगदगुरू शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी ने कहा कि मंदिर के नाम पर दूषित राजनीति न की जाए। उन्होंने कहा कि पार्लियामेंट के माध्यम से राम मंदिर बनाने का मार्ग प्रशस्त हो। एक दल प्रस्ताव लाए दूसरा उसे समर्थन दे।
उन्होंने कहा कि मुसलमान कृपा करके नहीं मानवाधिकार को ध्यान में रखकर मंदिर मार्ग को प्रशस्त करने में भी सहयोग करें। भारत की राजनीति दिशाहीन हो गई है। सत्ता, लोलुपता व स्वार्थ राजनीति का पर्याय नहीं है।
बाराबंकी में देर शाम पधारे जगदगुरू शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी चुनिंदा मीडिया कर्मियों से बात कर रहे थे। उन्होंने सवालों के जवाब में कहा कि बर्बरता करने वाले के नाम से मस्जिद बने यह भारत के लिए कलंक की बात है। देशवासियों को यह बात ध्यान रखनी चाहिए कि भारत और अमेरिका वर्षों तक परतंत्र रहे, पर उनकी स्वतंत्रता का शाश्वत नहीं खोता।
अराजकता का परिचय देकर हमारे प्रशस्त मानबिंदुओं को विकृत किया गया। हम सोमनाथ की तरह उनका स्वरूप देंगे। शिक्षा प्रणाली कृषि, सेवा उद्योग संविधान सब बाहरी है। विकास के नाम पर सनातन प्रक्रिया नहीं अपनाई जाती। विकास वेद विहीन विज्ञान व ऊर्जा के क्षेत्र में राजनीतिक दलों का दायित्व है कि वह अपने को सर्वज्ञ न समझें। उन्हें राजनीतिक स्वरूप के बारे में जानकारी जुटानी चाहिए।
जगदगुरू ने कहा कि भारत में मुस्लिम तंत्र जितना सुरक्षित है उतना बांग्लादेश, पाक व अरब देशों में नहीं है। पहले रानीतिक दल अपने को परखें। मुस्लिम तंत्र उदारता को दुर्बलता न समझे। उन्होंने कहा कि गांधी जी ने पाकिस्तान को इसलिए बनाया कि वे वहां खुश रहें और हम यहां खुश रहें। पर वह बात आज सही साबित नहीं हुई।
आज पाकिस्तान दुनिया में आतंक का पर्याय बन चुका है। उन्होंने कहा कि सनातन वर्ण व्यवस्था खत्म हुई तो विकास क्या होगा। मनुष्यता ही समाप्त हो जाएगी। शंकराचार्य ने कहा कि कोई भी व्यक्ति वर्गतंत्र को विवश किया जाता है तो अस्तित्व की रक्षा के लिए स्वयं व्यक्ति रास्ता निकाल लेेता है।