शनिवार को बिना स्वेटर पहने स्कूल में पढ़ाई करते बच्चे।
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प्रदेश की योगी सरकार ने परिषदीय स्कूलों के बच्चों को निशुल्क ड्रेस, जूता-मोजा के साथ स्वेटर ठंडक से पहले वितरण किए जाने का दावा किया था। जिसके लिए सभी जिलों से बच्चों की उम्रवार संख्या मांगी थी। पोर्टल जारी कर जिलावार वितरण प्रणाली गठित कर फर्मों से आवेदन मांगे थे। लेकिन अब तक सरकार के ढुलमुल रवैये से न तो फर्म का चयन हो पाया, न ही रेट निर्धारित हो सका है। जिससे परिषदीय स्कूलों के 324483 बच्चे रोज ठंड से कांपते हुए स्कूल जाने को मजबूर हैं।
जिले के 3071 परिषदीय स्कूलों में 324483 बच्चों का पंजीकरण इस वर्ष हुआ है। शासन द्वारा जिलावार पोर्टल जारी कर बच्चों की उम्रवार संख्या अपलोड कराने को कहा गया था। बाराबंकी जिले ने अपनी संख्या अपलोड कर डिमांड भी भेजी थी।
जिसके सापेक्ष बच्चों को ड्रेस, जूता-मोजा देने के बाद स्वेटर देना भूल गए। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि स्वेटर आपूर्ति के लिए विभिन्न फर्मों से आवेदन मांगे गए थे। आपूर्ति के लिए निदेशालय से 16 अक्तूबर की डेडलाइन जारी की गई थी।
निदेशालय की लापरवाही से अभी तक स्वेटर आपूर्ति के लिए जिलावार फर्मों का चयन तक नहीं हो सका। इतने दिन में सिर्फ स्वेटर का कलर महरून व संभावित दाम 170 रुपये लागू की गई है। निदेशालय से ठोस कार्रवाई न होने से ठंड से बचाने की स्वेटर वितरण योजना धरातल पर नहीं उतर सकी है। जिसका खामियाजा नौनिहालों को ठंड में ठिठुरते हुए स्कूल आकर भुगतना पड़ रहा है।
शासन स्तर से स्वेटर आपूर्ति के लिए फर्मों का चयन नहीं हो पाया है। शासन से मिले निर्देशों का पालन कराते हुए पोर्टल पर बच्चों की संख्या उम्रवार अपलोड कर दी गई है। खरीद का अभी कोई बजट भी रिलीज नहीं हुआ है। फर्म का चयन होनेे के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। - पीएन सिंह, बीएसए