बाराबंकी। सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन वर्तमान में स्थानीय नागरिकों और नगर पालिका प्रशासन के लिए गले की हड्डी बन गई है। शहर के विभिन्न मोहल्लों में पाइपलाइन डालने के नाम पर सड़कों को खोदकर छोड़ दिया गया है, जिससे आवागमन दूभर हो गया है। सबसे गंभीर स्थिति उन इलाकों की है जहां नई सड़कों का निर्माण प्रस्तावित है, लेकिन कार्यदायी संस्था की सुस्ती के कारण विकास कार्य अधर में लटके हुए हैं।
नगर पालिका परिषद बाराबंकी ने शहर के कायाकल्प के लिए दर्जन भर से अधिक सड़कों के निर्माण के लिए निविदाएं (टेंडर) जारी कर दी हैं। नियम है कि सड़क बनने से पहले पाइपलाइन बिछाने का कार्य पूर्ण हो जाना चाहिए, ताकि नई बनी सड़क को दोबारा न खोदना पड़े। हालांकि, जल जीवन मिशन की कार्यदायी संस्था इस दिशा में घोर लापरवाही बरत रही है। दशहराबाग जैसे क्षेत्रों में सड़क निर्माण का काम शुरू हो चुका है, लेकिन पाइपलाइन न पड़ने के कारण तकनीकी और व्यावहारिक अड़चनें पैदा हो रही हैं।
इस अव्यवस्था को लेकर स्थानीय सभासदों और उनके प्रतिनिधियों में गहरा असंतोष व्याप्त है। सभासद प्रतिनिधि आलोक वर्मा ने अधिशाषी अधिकारी (ईओ) से मिलकर अपनी शिकायत दर्ज कराई है। वहीं, सभासद पंकज मिश्रा ने बताया कि कैलाश आश्रम वार्ड में पाइपलाइन न डालने के कारण विकास कार्य पूरी तरह ठप हैं।
मंझपुरवा और नागेश्वर नाथ सोता मार्ग के सभासद प्रतिनिधि मुजीब ने आरोप लगाया कि पाइपलाइन डालने के बाद सड़कों की मरम्मत नहीं की गई है, जिससे आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। पटेल नगर और दशहराबाग की गलियां भी इसी बदहाली का शिकार हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर पालिका के अधिशाषी अधिकारी संजय कुमार शुक्ला ने कार्यदायी संस्था के प्रति कड़ा रुख अपनाया है। ईओ ने स्पष्ट किया कि पाइपलाइन बिछाने के लिए चिह्नित सड़कों की सूची संस्था को काफी समय पहले ही उपलब्ध कराई जा चुकी है।
उन्होंने संस्था के प्रतिनिधियों को अंतिम चेतावनी देते हुए निर्देश दिया है कि सड़क निर्माण से पहले पाइपलाइन का कार्य हर हाल में पूरा किया जाए। ईओ ने इस संबंध में एक औपचारिक पत्र भी जारी किया है और कहा है कि जनता की असुविधा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।