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इलाज में लापरवाही से नवजात की मौत

Thu, 23 Jul 2015 10:03 PM IST
बाराबंकी/अमर उजाला ब्यूरो
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 परिवारीजनों ने फार्मासिस्ट पर रिश्वत मांगने और इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए मामले की शिकायत पुलिस में की है। उधर, नवजात की मौत से नाराज वकीलों ने बृहस्पतिवार को कार्य बहिष्कार दिया। वकीलों ने एसडीएम को ज्ञापन सौंप कार्रवाई की मांग की है।
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फतेहपुर कोतवाली व कस्बा के मोहल्ला पचघरा निवासी आशुतोष श्रीवास्तव की पत्नी रितिका (21) को बुधवार सुबह प्रसव पीड़ा होने पर परिवारीजन सीएचसी फतेहपुर ले गए। यहां पर डॉ. शालिनी ने रितिका की प्राथमिक जांच की। उन्होंने प्रसव में दिक्कत बताते हुए परिवारीजनों को रितिका का अल्ट्रासाउंड कराने करने की सलाह दी।

 परिवारीजन रितिका का अल्ट्रासाउंड कराने गए। इसी बीच डॉ. शालिनी ने लखनऊ किसी मीटिंग में शामिल होने की बात कह रितिका को जिला अस्पताल के रेफर कर दिया।

रितिक के पति अशुतोष ने बताया कि अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट आने जब अस्पताल पहुंचे तो डॉ. शालिनी जा चुकी थीं। यहां पर फार्मासिस्ट जेएन पांडेय मिले। उन्होंने रितिका की हालत व रिपोर्ट देखी।
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बताया कि प्रसव यहीं पर हो जाएगा। उन्होंने इसके लिए कुछ रुपये की मांग की और रितिका को सीएचसी में भर्ती करा दिया। रात करीब दस बजे रितिका का प्रसव एएनएम मंजू मिश्रा ने कराया, लेकिन नवजात की हालत गंभीर बनी रही। दूसरे डॉक्टर केसी जायसवाल ने नवजात का उपचार किया, लेकिन कुछ ही देर में उसकी मौत हो गई।

प्रसूता की हालत गंभीर होने पर उसे ऑक्सीजन भी नहीं उपलब्ध कराई जा सकी। आनन-फानन प्रसूता रितिका के भाई गुड्डू ने अपने मुंह से रितिका के मुंह में ऑक्सीजन दी। परिवारीजनों ने उपचार में लापरवाही से नवजात की मौत की शिकायत पुलिस में की है।

प्रसूता के चाचा ससुर अधिवक्ता राकेश श्रीवास्तव ने सीएचसी में उपचार में लापरवाही से नवजात की मौत की बात कही। नवजात की इलाज में लापरवाही से मौत से नाराज वकीलों ने बृहस्पतिवार को अधिवक्ताओं ने कार्य बहिष्कार किया। वकीलों ने इसके लिए अस्पताल स्टाफ को दोषी बताते हुए एसडीएम फतेहपुर को ज्ञापन सौंपा और दोषियों पर कार्रवाई की मांग।

सीएचसी फतेहपुर प्रभारी डॉ. आरपी वर्मा ने बताया कि प्रसूता के इलाज में कोई लापरवाही नहीं बरती गई। जन्म लेने से पहले ही बच्चे की मौत हो चुकी थी। अस्पताल में ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है।
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