बाराबंकी। नीट परीक्षा के प्रदर्शन को लेकर छात्रों के साथ हुई कथित मारपीट और दिल्ली में राहुल गांधी, अखिलेश यादव व प्रियंका गांधी वाड्रा की गिरफ्तारी के बाद उपजे राजनीतिक विवाद पर बाराबंकी के युवाओं और विद्यार्थियों ने अमर उजाला से खुलकर अपनी बात रखी। छात्रों का स्पष्ट कहना है कि नीट देश के लाखों विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ी परीक्षा है, इसलिए इस मुद्दे को राजनीति से ऊपर उठकर सुलझाया जाना चाहिए।
छात्र कात्यायनी तिवारी और पूर्णेश वर्मा ने बातचीत के दौरान कहा कि लाखों छात्र सालों तक दिन-रात मेहनत करके नीट जैसी कठिन प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करते हैं। ऐसे में परीक्षा या परिणाम को लेकर कोई भी विवाद खड़ा होता है, तो उसका सीधा असर छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और भविष्य पर पड़ता है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि परीक्षा प्रणाली को और अधिक मजबूत, पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की सख्त जरूरत है, ताकि किसी भी विद्यार्थी के मन में प्रणाली को लेकर संदेह न रहे।
निष्पक्ष जांच और सुरक्षा व्यवस्था पर जोर: योगेंद्र वर्मा और हिमांशु वर्मा ने कहा कि परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था इतनी पुख्ता होनी चाहिए कि गड़बड़ी की कोई गुंजाइश ही न बचे। पारदर्शिता सिर्फ परीक्षा कराने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि मूल्यांकन और परिणाम जारी करने की पूरी प्रक्रिया को साफ-सुथरा बनाया जाना चाहिए।
छात्रों के साथ हुई कथित मारपीट पर दुख जताते हुए उन्होंने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जो भी दोषी हों, उन पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
राजनीतिक घटनाक्रम पर राय : विकास और प्रशांत ने कहा कि नीट जैसे संवेदनशील मुद्दे पर किसी भी राजनीतिक दल को रोटियां नहीं सेकनी चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि विपक्ष छात्रों के साथ खड़ा होकर उनकी आवाज सरकार तक पहुंचा रहा है, तो इसे एक सकारात्मक कदम के रूप में देखा जाना चाहिए।
सभी छात्रों ने एकसुर में अपील की कि सरकार और विपक्ष दोनों को आपसी आरोप-प्रत्यारोप छोड़कर केवल और केवल छात्रों की समस्याओं के स्थायी समाधान पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।