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Barabanki News: मस्जिद व 15 मकान नदी में समाए, बढ़ी दुश्वारियां

Fri, 11 Sep 2026 12:20 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
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सूरतगंज। सरयू नदी के उफान ने तराई के करीब 30 गांवों में दुश्वारियां बढ़ा दी है। रामनगर तहसील के हेतमापुर गांव में नदी के कटान ने मंदिर व दूरभाष केंद्र के बाद अब गांव की 150 साल पुरानी मस्जिद व 15 अन्य मकान को भी चपेट में ले लिया है। बृहस्पतिवार को मस्जिद के आधे हिस्सा के साथ कई मकान नदी में समा गए। यहां बेघर हुए परिवारों को बतनेरा के बाढ़ राहत केंद्र के भवन में आश्रय दिया गया है। नदी का जलस्तर कुछ कम होने के बावजूद खतरे के लाल निशान से अभी भी 39 सेमी ऊपर है।
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सामान्य दिनों में सरयू नदी हेतमापुर गांव से करीब 500 मीटर दूर बहती है। पिछले दो महीने से घटते-बढ़ते जलस्तर के बीच नदी ने केदारीपुर गांव में कटान शुरू की थी। तब ग्रामीणों को यह अंदाजा नहीं था कि हेतमापुर गांव भी कटान की चपेट में आ जाएगा। बीते तीन दिनों से बदली नदी की धारा से हेतमापुर गांव की सैकड़ों बीघा खेतिहर व आवासीय भूमि नदी में समा चुकी है। राम लोटन, मैकू, शोभा, सलीम दर्जी, बानो, अकील और रुकसाना सहित करीब 15 लोगों के मकान पूरी तरह नदी में समा चुके हैं। नदी का पानी अब बाबा नारायण दास समाधि स्थल से महज 15 मीटर की दूरी पर है। इससे ग्रामीणों में दहशत व्याप्त है।
गांव निवासी सलीम, पिलाई, अयूब, कय्यूम, कासिम, द्वारिका प्रसाद, संतोष कुमार, उत्तम आदिल के मकान अब कटान के मुहाने पर हैं। परिवार के लोग घर खाली कर सामान और ईंटें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटे हैं। बाढ़ खंड की ओर से कटान रोकने के लिए बड़े पत्थर मंगवाए गए हैं, लेकिन अभी तक इन्हें लगाने का काम शुरू नहीं हुआ है।
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रात में सो रहे परिवार को ग्रामीणों ने जगाया
कटान की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बुधवार रात हेतमापुर में पद्मावती अपनी बेटी सरोज और दामाद अरविंद के साथ रात में घर के अंदर सो रही थीं। नदी की कटान उनके घर तक पहुंच गई। ग्रामीणों ने जब घर से किसी को बाहर निकलते नहीं देखा तो तीनों को जगाकर सुरक्षित बाहर निकाला। द्वारिका प्रसाद ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में इस तरह की कटान पहली बार देखी है।
पढ़ाई छोड़ बच्चे कर रहे रखवाली
बाढ़ से प्रभावित परिवारों के अभिभावक रोजी-रोटी और रहने के लिए सुरक्षित जगह की तलाश में इधर-उधर भटक रहे हैं। ऐसे में बच्चे पढ़ाई-लिखाई छोड़कर स्कूल जाने की जगह राहत केंद्र में रखे सामान की रखवाली करने को मजबूर हैं। कोटवाधाम में भी जलस्तर कम होते ही सिरौलीगौसपुर तहसील क्षेत्र में नदी की कटान तेज हो गई है। सिरौलीगुंग, घुटरू, बबुरी गांव में दो दिनों के भीतर करीब 50 बीघा से अधिक कृषि भूमि नदी में समा चुकी है।
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