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मोबाइल की लत: बच्चों के विकास और सेहत पर गहरा असर

Thu, 27 Nov 2025 12:14 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
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बाराबंकी। छोटे बच्चों को चुप कराने या दूध पिलाते समय उनके हाथ में मोबाइल थमा देना आज के माता-पिता की एक सामान्य लेकिन खतरनाक आदत बन गई है। विशेषज्ञों के अनुसार यह आदत बच्चों के लिए गंभीर खतरा साबित हो रही है। लगातार मोबाइल के संपर्क में रहने से बच्चों में स्क्रीन एडिक्शन, धीमा विकास, भाषा सीखने में बाधा और परिवार से भावनात्मक दूरी जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं।
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वरिष्ठ बालरोग विशेषज्ञ डॉ. बीएम मौर्या ने बताया कि तीन से चार वर्ष तक के बच्चों में स्क्रीन की लत के मामले बढ़े हैं। माता-पिता अपनी सुविधा के लिए बच्चों को मोबाइल देते हैं, लेकिन कई बच्चे तो स्क्रीन हटाते ही रोने लगते हैं, चिढ़ते हैं और कई बार प्रतिक्रिया देना तक बंद कर देते हैं। यह सुविधा आगे चलकर गंभीर विकासात्मक समस्याओं में बदल जाती है। बच्चों के प्राकृतिक सीखने, बोलने, सामाजिक जुड़ाव और आंखों की सेहत पर इसका गहरा असर पड़ रहा है। दो वर्ष तक के बच्चों को मोबाइल बिल्कुल नहीं दिखाना चाहिए। अत्यधिक स्क्रीन का उपयोग बच्चों में वर्चुअल बिहेवियर डिसऑर्डर जैसी स्थिति पैदा कर सकता है। ऐसी स्थिति में बच्चा परिवार के बुलाने पर तो प्रतिक्रिया नहीं देता, लेकिन मोबाइल की आवाज, संगीत या डायलॉग पर तुरंत प्रतिक्रिया देता है। इसके अलावा, अत्यधिक स्क्रीन टाइम आंखों की रोशनी पर गंभीर असर डाल रहा है। कई बच्चों में मोटापा, चिड़चिड़ापन और भाषा विकास में देरी जैसी समस्याएं दिख रही हैं।
डॉ. मौर्या ने बताया कि दूध की बोतल लगाकर बच्चे के हाथ में मोबाइल पकड़ा देना उसकी खाने की आदतों, आत्म-नियमन क्षमता और भावनात्मक विकास को कमजोर कर रहा है। माता-पिता का खुद भी स्क्रीन एडिक्शन का शिकार होना, इसका सीधा असर बच्चों पर डालता है।
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बच्चों में बढ़ रहीं ये गंभीर समस्याएं-
- भाषा विकास बाधित होना
- स्वाद और भोजन पहचानने में दिक्कत
- मोटापा बढ़ने की संभावना
- मानसिक सहन क्षमता कम होना
- आंखों की रोशनी पर नकारात्मक प्रभाव
- परिवार से भावनात्मक दूरी बढ़ना
बचाव के सरल उपाय-

- बच्चा रोये तो मोबाइल देने के बजाय उसकी जरूरत समझें और उससे बात करें।
- दो वर्ष तक के बच्चों को मोबाइल बिल्कुल न दिखाएं।
- दूध पिलाते समय बच्चे को गोद में रखें और आंखों का संपर्क बनाएं।
- खाने के दौरान बच्चे से बातचीत करें, ताकि वह भोजन और स्वाद को पहचान सके।
- माता-पिता भी अपने स्क्रीन टाइम को कम करें ताकि बच्चे आपका अनुकरण न करें।
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