खरीद में लगाई गई सरकारी एजेंसियाें के लिए बिचौलिये रीढ़ की हड्डी से कम नहीं होते हैं। इनके बिना आज तक कोई भी खरीद नहीं हो सकी है क्योंकि क्रय केंद्र प्रभारियों की आय का एक मात्र साधन यही होते हैं। इस बार भी गेहूं खरीद में बिचौलिये हावी न रहे ऐसा संभव नहीं है।
सरकार द्वारा समर्थन मूल्य घोषित किए जाने के साथ ही बिचौलिये भी सक्रिय हो गए हैं। जबकि सरकारी केंद्रों पर अपना उत्पाद बेचने के लिए किसान केंद्रों के चक्कर काटते रहते हैं और थक हार कर अपना उत्पाद बिचौलियों के हाथों औने-पौने दामों पर बेच देते हैं।
गेहूं की खरीद इस वर्ष 1 अप्रैल से शुरू हो गई है। विपणन शाखा समेत करीब आठ एजेंसियां गेहूं की खरीद में लगाई गई हैं। किसानों से गेहूं खरीदने के लिए इन एजेंसियों ने 87 गेहूं खरीद केंद्र खोले हैं। खरीद एजेंसियों का दावा है कि वह सीधे किसानों से गेहूं की खरीद करेगी। यदि बिचौलिये हावी होने का प्रयास करेंगे तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर हैं क्रय केंद्र प्रभारियों की शह पर ही बिचौलिये किसानों का शोषण करते हैं। जिस गेहूं को मानक के विपरीत बताकर केंद्र से वापस किया जाएगा वही गेहूं यही बिचौलिये किसानों से औने-पौने दामों पर खरीदेंगे और इसके बाद खसरा, खतौनी या किसान बही लगाकर क्रय केंद्र पर घोषित समर्थन मूल्य 1525 रुपये प्रति क्विंटल में बेच देंगे।
बिचौलियों के बिना गेहूं की खरीद हो पाना संभव नहीं है। क्योंकि क्रय केंद्र प्रभारियों की एकमात्र आय का साधन यही बिचौलिए होते हैं।